नालंदा साहित्य महोत्सव 2027 की रूपरेखा तैयार करेगी साल भर चलने वाली बहु-शहरी संवाद श्रृंखला

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नालंदा साहित्य महोत्सव 2027 की रूपरेखा तैयार करेगी साल भर चलने वाली बहु-शहरी संवाद श्रृंखला

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  • Publish Date - May 13, 2026 / 07:57 PM IST,
    Updated On - May 13, 2026 / 07:57 PM IST

नई दिल्ली, 13 मई (भाषा) नालंदा साहित्य महोत्सव 2027 के दूसरे संस्करण की तैयारी के क्रम में, बहु-शहरी ‘नालंदा संवाद’ श्रृंखला नीति-निर्माताओं, विद्वानों, लेखकों और सांस्कृतिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को दर्शनशास्त्र, भाषा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अनुवाद और पर्यावरण जैसे विषयों पर चर्चा के लिए एक मंच पर लाएगी।

इस श्रृंखला की शुरुआत 9-10 मई को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से हुई और यह साहित्य महोत्सव (17-20 अक्टूबर, 2027) से पहले श्रीनगर, बेंगलुरु, सूरत/अहमदाबाद, कालीकट, बोधगया, पटना, जयपुर, गुवाहाटी, मुंबई, कोहिमा और कोलकाता जैसे शहरों में आयोजित किया जाएगा।

यह घोषणा इस महोत्सव के आयोजक, पटना स्थित गैर-लाभकारी न्यास (ट्रस्ट) ‘धनु बिहार’ ने की।

यह श्रृंखला मॉरीशस और इंग्लैंड जैसे अंतरराष्ट्रीय स्थलों तक भी पहुंचेगी, जहां यह ‘प्रवासी समुदाय, उत्तर-औपनिवेशिक ज्ञान प्रणालियों, और साझा एशियाई व ‘ग्लोबल साउथ’ (वैश्विक दक्षिण) के बौद्धिक इतिहासों को केंद्र में रखेगी; साथ ही, यह जीवंत अनुभवों और विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को और अधिक सुदृढ़ करेगी।’’

न्यास ने बुधवार को एक बयान में कहा, ‘‘प्रत्येक संवाद ‘विश्व में नालंदा और नालंदा में विश्व’ की व्यापक परिकल्पना पर आधारित होगा। यह इस श्रृंखला को केवल एक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि विचारों की एक ऐसी निरंतर प्रवाहमान धारा के रूप में स्थापित करता है जो भौगोलिक सीमाओं और विभिन्न विषयों के पार तक विस्तृत है।’’

इस संवाद का विषयगत दृष्टिकोण प्रत्येक शहर की विशिष्टता के अनुरूप ढाला जाएगा—जैसे श्रीनगर में सांस्कृतिक स्मृति और पहचान; बेंगलुरु में प्रौद्योगिकी और ज्ञान का भविष्य; सूरत/अहमदाबाद में व्यापार और प्रवासी समुदाय के अनुभव; कालीकट में समुद्री व्यापार और अंतर-सांस्कृतिक आदान-प्रदान; तथा बोधगया में आध्यात्मिक और दार्शनिक अन्वेषण।

यह संवाद श्रृंखला पटना और कोलकाता में भाषाई व क्षेत्रीय साहित्यिक परंपराओं; जयपुर में विरासत और बौद्धिक इतिहास; गुवाहाटी और कोहिमा में पारिस्थितिक व स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों; तथा मुंबई में वैश्विक सांस्कृतिक संगमों का अन्वेषण करेगी।

दिल्ली में आयोजित उद्घाटन सत्र ने इस श्रृंखला को एक ऐसे मंच के रूप में प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य ‘भारत की ज्ञान, संवाद और सांस्कृतिक निरंतरता की सुदृढ़ व प्राचीन परंपराओं को पुनर्जीवित करना’ है, और साथ ही उन्हें समकालीन शासन-प्रणाली व वैश्विक विमर्श से जोड़ना है।

नालंदा साहित्य महोत्सव की अध्यक्ष डी. आलिया ने कहा ‘‘यह संवाद अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने की एक कोशिश है, जो शासन, संस्कृति और साहित्य को एक साथ एक ही धारा में लाता है; जहां नीतियां सांस्कृतिक समझ पर आधारित होती हैं और युवा उस कहानी को गढ़ने में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं।’’

दिल्ली संस्करण में लेखकों, नौकरशाहों, विद्वानों और कलाकारों को आमंत्रित किया गया, जिनमें पुरुषोत्तम अग्रवाल, शोवना नारायण, अमिताभ कांत, त्रिपुरारी शरण, सचिन चतुर्वेदी और विलियम डेलरिम्पल शामिल थे। यहां शासन, संस्कृति और साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर बहु-विषयक चर्चाएं हुईं।

आलिया ने कहा कि इस शृंखला का उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना है जहां संवाद ही तरीका भी हो और परिणाम भी, और जहां नालंदा की विरासत को केवल एक याद के तौर पर नहीं, बल्कि एक जीवंत वैश्विक ज्ञान परंपरा के रूप में फिर से सक्रिय किया जाए।’’

नालंदा साहित्य महोत्सव के कार्यकारी निदेशक संजय कुमार ने कहा ‘‘नालंदा के विनाश से उसकी विरासत खत्म नहीं हुई; जिस बात पर अभी भी पर्याप्त चर्चा नहीं हुई है, वह यह है कि वहां के विद्वानों ने उस ज्ञान को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों तक कैसे पहुंचाया। नालंदा की असली निरंतरता उसके खंडहरों में नहीं, बल्कि उन बौद्धिक यात्राओं में निहित है जिन्हें उसने संभव बनाया।’’

नालंदा संवाद शृंखला के अलावा, इस साहित्य उत्सव के साल भर चलने वाले कार्यक्रमों में मासिक पॉडकास्ट, ‘राइटर-इन-रेजिडेंस’ कार्यक्रम, नालंदा अनुवाद फेलोशिप, और युवा विद्वानों व रचनात्मक लेखकों के लिए अनुदान शामिल हैं।

बयान के अनुसार, इस उत्सव का उद्देश्य विद्वानों, लेखकों, कलाकारों, इतिहासकारों और नीति-निर्माताओं को आमंत्रित करना है, जिनमें अमिताभ घोष, अनुपम खेर, बानू मुश्ताक, जी.एन. डेवी, संजीव सान्याल, विशाल भारद्वाज, शशि थरूर और सुधा मूर्ति शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय अतिथि वक्ताओं की संभावित सूची में सलमान रुश्दी, हान कांग, सुनीता विलियम्स, झुम्पा लाहिड़ी और बॉब डिलन के नाम भी शामिल हैं।

भाषा नरेश नरेश पवनेश

पवनेश