पश्चिमी विचारों से प्रभावित होकर लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे युवा : इलाहाबाद उच्च न्यायालय

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पश्चिमी विचारों से प्रभावित होकर लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे युवा : इलाहाबाद उच्च न्यायालय

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  • Publish Date - January 26, 2026 / 03:01 PM IST,
    Updated On - January 26, 2026 / 03:01 PM IST

प्रयागराज, 26 जनवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक निर्णय में कहा है कि पश्चिमी विचारों से प्रभावित होकर युवा ‘लिव-इन-रिलेशनशिप’ में रह रहे हैं और इस तरह के संबंध विफल होने पर दुष्कर्म के आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करा दी जाती है।

अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए एक युवक को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी। युवक पर कथित तौर पर एक नाबालिग लड़की का अपहरण करके उसका यौन शोषण करने का आरोप था।

अदालत ने पाया कि घटना के समय लड़की बालिग थी और वह अपनी इच्छा से आरोपी युवक के साथ घर छोड़कर गई थी।

चंद्रेश नामक युवक की अपील स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्र की खंडपीठ ने कहा कि पश्चिमी विचारों से प्रभावित होकर युवाओं के बीच बिना विवाह के ‘लिव-इन-रिलेशनशिप’ में रहने का चलन बढ़कर गया है और जब ऐसे संबंध विफल होते हैं तो प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है।

पीठ ने यह भी कहा कि चूंकि कानून महिलाओं के पक्ष में हैं, पुरुष इन कानूनों के आधार पर दोषी ठहराए जाते हैं, जबकि ये कानून तब बनाए गए थे जब ‘लिव-इन-रिलेशनशिप’ की अवधारणा अस्तित्व में कहीं नहीं थी।

मुकदमे के अनुसार, एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता शादी के बहाने उसकी बेटी को भगाकर ले गया और बाद में उसे बेंगलुरु ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

निचली अदालत ने अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 363 (अपहरण), 366 (विवाह के लिए अपहरण) और 323 (जानबूझकर उत्पीड़न करना), पॉक्सो और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम की संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया था जिसके खिलाफ उसने उच्च न्यायालय में अपील की थी।

रिकॉर्ड पर गौर करने के बाद अदालत ने पाया कि पीड़िता बालिग थी और निचली अदालत ने ‘ऑसिफिकेशन टेस्ट’ रिपोर्ट पर उचित ढंग से विचार नहीं किया था जिसमें पीड़िता की आयु करीब 20 वर्ष सिद्ध हुई थी।

अदालत ने पाया कि लड़की युवक के साथ बेंगलुरु में घनी आबादी वाले क्षेत्र में छह महीने तक रही और सहमति से शारीरिक संबंध बनाए और जब युवक ने उसे छह अगस्त, 2021 को शिकारपुर चौराहे पर वापस छोड़ दिया तब उसने अपने परिवार से संपर्क किया।

अदालत ने कहा कि आईपीसी की धारा 363 और 366 के तहत दोषीसिद्धि पूरी तरह अवांछित थी क्योंकि पीड़िता बालिग थी और वह अपनी इच्छा से भागी थी।

भाषा सं राजेंद्र मनीषा जोहेब

जोहेब