कोलकाताः West Bengal Election Result Analysis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे के लिए काउंटिंग जारी है। अब तक रुझानों के मुताबिक, सूबे में बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है। बंगाल की 293 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। बंगाल में बीजेपी 192 सीटों पर बढ़त बनाई हुई है। वहीं टीएमसी 96 सीटों पर ही सिमटती दिख रही है। हम आपको उन 5 वादों को बारे में बताते हैं, जिनके असर की काट TMC ढूंढ़ ही नहीं पाई और भाजपा बाजी मार गई।
West Bengal Election Result Analysis: बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार घुसपैठ के मुद्दे को उठाया। पार्टी का कहना था कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान कर उन्हें बाहर किया जाएगा। इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जोड़कर पेश किया गया। खासतौर पर सीमावर्ती इलाकों में यह वादा लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना रहा। बता दें कि पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में बड़ी संख्या में घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं, और स्थानीय निवासियों को उनसे दिक्कत महसूस होती थी। ऐसे में बीजेपी के इस वादे ने काफी काम किया।
बीजेपी ने आम लोगों के लिए कई नई जनकल्याणकारी योजनाओं का वादा किया। इसमें गरीबों, किसानों और महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं शामिल थीं। पार्टी ने दावा किया कि केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में सही तरीके से लागू किया जाएगा। साथ ही पार्टी ने ऐलान किया था कि अगर सूबे में बीजेपी की सरकार बनती है तो मई महीने से राज्य की हर महिला के बैंक खाते में 3000 रुपए भेजे जाएंगे। इसके साथ बेरोजगार युवाओं के खातों में भी 3000 रुपए प्रति माह जमा कराने का वादा किया गया था। बंगाल के रुझानों को देखते हुए कहा जा सकता है कि बीजेपी का यह वादा काम कर गया।
कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी बीजेपी के प्रचार का अहम हिस्सा रहा। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध और हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज के ‘रेप ऐंड मर्डर केस’ ने पश्चिम बंगाल की छवि न सिर्फ पूरे देश में खराब की, बल्कि सूबे में भी इसे लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। ऐसे ही कई मामलों की नजीर देते हुए बीजेपी ने वादा किया कि सत्ता में आने पर कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और सूबे में योगी आदित्यनाथ का यूपी मॉडल लागू किया जाएगा। साथ ही अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की ‘गुंडागर्दी’ पर भी लगाम कसने और उन्हें ‘उल्टा लटकाकर सीधा करने’ की भी बात कही। इस मुद्दे ने खासकर शहरी और मध्यम वर्ग के मतदाताओं के बीच असर डाला।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा बीजेपी ने जोर-शोर से किया। पार्टी ने कहा कि सरकारी योजनाओं में हो रही गड़बड़ियों और घोटालों पर रोक लगाई जाएगी। बीजेपी के नेताओं ने लगातार पारदर्शिता बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया गया। पार्टी ने TMC पर ‘सिंडिकेट राज’ चलाने का आरोप लगाया और कहा कि 5 तारीख को भाजपा की सरकार बनते ही राज्य में टीएमसी के सभी सिंडिकेट खत्म कर दिए जाएंगे। इस मुद्दे ने उन मतदाताओं को प्रभावित किया जो लंबे समय से सिस्टम में सुधार की उम्मीद कर रहे थे।
बीजेपी ने राज्य में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने का भी वादा किया। पार्टी का कहना था कि बंगाल में बंद हो चुके उद्योगों को फिर से शुरू किया जाएगा और नए निवेशकों को आकर्षित किया जाएगा। बीजेपी नेताओं ने बार-बार कहा कि उद्योग धंधे आने से सूबे में नौजवानों को रोजगार मिलेगा और बेरोजगारी में कमी आएगी। युवाओं और व्यापार से जुड़े लोगों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहा। इसके अलावा बीजेपी ने किसानों से उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने का वादा किया जिसने कही न कहीं कृषक वर्ग को प्रभावित किया।