BJP Major Electoral Issues in West Bengal || Image- AI Generated File
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझान राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं। अब तक के ट्रेंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पीछे नजर आ रही है। (BJP Major Electoral Issues in West Bengal) अगर यह रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो यह बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा। इस बार की लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं रही, बल्कि यह पूरी तरह राजनीति और सामाजिक समीकरणों की भी रही।
भाजपा ने जहां अपने वादों के जरिए मजबूत नैरेटिव खड़ा किया, वहीं “एम फैक्टर” ने भी चुनावी गणित को प्रभावित किया। भाजपा ने अवैध घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बनाया। बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बाहर करने का वादा खासकर सीमावर्ती इलाकों में असरदार साबित हुआ। इसे सुरक्षा और स्थानीय अधिकारों से जोड़कर पेश किया गया।
महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने जैसे वादों का भी असर देखने को मिला। केंद्र की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने का भरोसा दिया गया, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग में भाजपा की पकड़ मजबूत हुई। ( BJP Major Electoral Issues in West Bengal) राज्य में बढ़ती हिंसा और अपराध के मुद्दे को भी भाजपा ने जोर-शोर से उठाया और सख्त कानून व्यवस्था लागू करने की बात कही।
सिंडिकेट राज खत्म करने और पारदर्शिता लाने का वादा भाजपा के प्रचार का अहम हिस्सा रहा। लंबे समय से सिस्टम से नाराज वोटरों तक यह संदेश सीधे पहुंचा। बंद पड़े उद्योगों को चालू करने और नए निवेश लाने के वादों ने युवाओं और व्यापारिक वर्ग को आकर्षित किया। “सोनार बांग्ला” का सपना भी इसी से जोड़ा गया।
इन सबके साथ भाजपा ने “एम फैक्टर” पर भी काम किया, जिसने चुनावी परिणामों को प्रभावित किया। मुस्लिम वोट पारंपरिक रूप से टीएमसी के साथ रहे हैं, लेकिन इस बार उनमें बंटवारा देखने को मिला। भाजपा ने इस वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की, जबकि ध्रुवीकरण भी असरदार रहा। (BJP Major Electoral Issues in West Bengal) नरेंद्र मोदी की रैलियों और राष्ट्रीय मुद्दों पर फोकस ने भाजपा को नई ऊर्जा दी, जबकि ममता बनर्जी की छवि टीएमसी की बड़ी ताकत बनी रही। कुल मिलाकर, भाजपा ने अपने वादों और सामाजिक समीकरणों के दम पर बढ़त बनाई, जबकि टीएमसी इनका प्रभावी जवाब देने के लिए संघर्ष करती दिखी।
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