Sarnath In UNESCO World Heritage : 28 साल बाद भारत को मिली बड़ी खुशखबरी! भगवान बुद्ध की इस पवित्र स्थली को मिला UNESCO World Heritage का दर्जा

वाराणसी स्थित भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया है। दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई विश्व धरोहर समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। 28 वर्षों के इंतजार के बाद मिली इस मान्यता से बौद्ध पर्यटन और भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी।

Sarnath In UNESCO World Heritage : 28 साल बाद भारत को मिली बड़ी खुशखबरी! भगवान बुद्ध की इस पवित्र स्थली को मिला UNESCO World Heritage का दर्जा

Sarnath In UNESCO World Heritage : Image Source : FILE

Modified Date: July 25, 2026 / 11:44 pm IST
Published Date: July 25, 2026 11:39 pm IST
HIGHLIGHTS
  • सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है।
  • यह भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है।
  • लगभग 28 वर्षों बाद सारनाथ को यह वैश्विक मान्यता मिली है।

वाराणसी : Sarnath In UNESCO World Heritage :  भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली वाराणसी के सारनाथ को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची (World Heritage Site) में शामिल कर लिया गया है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में शनिवार को यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। इस उपलब्धि के साथ सारनाथ भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है। लगभग 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिली इस मान्यता से बौद्ध सर्किट और पर्यटन को वैश्विक स्तर पर एक नया आयाम मिलेगा।

28 वर्षों का इंतजार हुआ खत्म

सारनाथ को 3 जुलाई 1998 को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया था। अब 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इसे पूर्ण विश्व धरोहर का दर्जा मिला है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के सभी तीनों विश्व धरोहर स्थल ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी आगरा क्षेत्र में ही स्थित थे। सारनाथ के शामिल होने से अब राज्य की वैश्विक सांस्कृतिक पहचान पूर्वांचल तक फैल गई है।

UNESCO’s Tentative List:  चौखंडी स्तूप और पुरातात्विक अवशेष शामिल

यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस धरोहर संपत्ति में चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं। ये दोनों स्थल एक-दूसरे से लगभग 626 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। भगवान बुद्ध और उनके पांच प्रथम शिष्यों के ऐतिहासिक मिलन का प्रतीक है। इसमें विश्व प्रसिद्ध धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन बौद्ध विहारों के अवशेष और ऐतिहासिक अशोक स्तंभ शामिल हैं।

बौद्ध आस्था का प्रमुख केंद्र ‘ऋषिपत्तन’

प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में ‘ऋषिपत्तन’ के नाम से वर्णित सारनाथ वह पावन भूमि है, जहां ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपने पांच शिष्यों को प्रथम उपदेश देकर ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ की शुरुआत की थी। Unesco-tourism करीब 2600 वर्षों से यह स्थल बौद्ध आस्था, शांति और मध्यम मार्ग के संदेश का प्रमुख केंद्र रहा है।

सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की सांस्कृतिक और सभ्यतागत धरोहर को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के प्रयासों का यह सुखद परिणाम है।

इन्हें भी पढ़ें:-


लेखक के बारे में

I’m Sneha Singh, a journalist and news producer at IBC24. A Gold Medalist in Journalism and Mass Communication, I specialize in news production, content writing, and digital storytelling. With a keen interest in political and crime reporting, I believe in delivering accurate, ethical, and impactful journalism that informs and connects with people.