भोजशाला मूलतः देवी सरस्वती का मंदिर है, यह कतई मस्जिद नहीं हो सकता: हिंदू पक्ष

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भोजशाला मूलतः देवी सरस्वती का मंदिर है, यह कतई मस्जिद नहीं हो सकता: हिंदू पक्ष

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  • Publish Date - April 6, 2026 / 07:12 PM IST,
    Updated On - April 6, 2026 / 07:12 PM IST

इंदौर, छह अप्रैल (भाषा) हिंदू पक्ष ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में सोमवार को कहा कि धार के विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर की मूल प्रकृति देवी सरस्वती के मंदिर की है और यह ऐतिहासिक स्मारक एक मस्जिद कतई नहीं हो सकता।

हिंदू पक्ष के मुताबिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड और विवादित परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट उसके इस दावे का समर्थन करती है।

भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने इस परिसर के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर सोमवार से नियमित सुनवाई शुरू की।

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ सभी संबद्ध पक्षों की दलीलें सिलसिलेवार तरीके से सुन रही है।

याचिकाकर्ताओं में शामिल संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की ओर से पैरवी करते हुए विष्णु शंकर जैन ने अदालत में कहा कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड, एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट और याचिका के साथ पेश तथ्यात्मक सामग्री साबित करती है कि विवादित परिसर का मूल चरित्र या प्रकृति देवी सरस्वती के मंदिर की है।

उन्होंने इस परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों, संस्कृत श्लोकों से युक्त शिलालेखों, मंडप और हवन कुंड होने का दावा करते हुए कहा कि यह स्मारक कोई मस्जिद हो ही नहीं सकता।

जैन ने कहा कि विवादित स्मारक उस हिंदू संरचना का भाग है जिसे धार के परमार राजवंश के राजा भोज ने 1034 ईस्वी में स्थापित किया था।

उन्होंने धार पर मुस्लिम आक्रांताओं के अलग-अलग हमलों का हवाला दिया और कहा कि गुजरे बरसों के दौरान भोजशाला परिसर में हिंदू प्रतीक चिह्नों को मिटाने के प्रयासों के बावजूद ये निशानियां आज भी मौजूद हैं।

जैन ने जोर देकर कहा कि कानूनी प्रावधानों के मुताबिक एएसआई के संरक्षित किसी भी स्मारक का मूल धार्मिक चरित्र बदला नहीं जा सकता, लिहाजा भोजशाला परिसर में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार प्रदान किया जाना चाहिए।

करीब दो घंटे चली सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के एक वकील ने कहा कि हिंदू पक्ष की याचिका के समर्थन में पेश तमाम दस्तावेजों की प्रतियां उन्हें मुहैया कराई जाएं।

उच्च न्यायालय ने यह गुहार मंजूर करते हुए मौखिक टिप्पणी की कि सिलसिलेवार दलीलें पूरी होने के बाद सभी पक्ष अपनी आपत्तियां पेश कर सकते हैं जिन पर अदालत विचार करेगी।

खंडपीठ ने कहा कि वह भोजशाला मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रखेगी।

एएसआई ने उच्च न्यायालय के आदेश पर दो साल पहले विवादित परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी।

एएसआई की 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि इस परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना पहले से विद्यमान थी और वहां वर्तमान में मौजूद एक विवादित ढांचा मंदिरों के हिस्सों का फिर से इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है।

मुस्लिम पक्ष ने एएसआई के सर्वेक्षण पर सवाल उठाते हुए हिंदुओं के इस दावे को खारिज किया है कि भोजशाला परिसर मूलत: एक मंदिर है।

मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि एएसआई ने उसकी पुरानी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए विवादित परिसर में ‘पीछे के रास्ते में रखी गईं चीजों’ को भी सर्वेक्षण में शामिल किया।

भाषा हर्ष धीरज

धीरज