Shah Mat Madhya Pradesh : जर्जर स्कूल का भार, शिक्षक होंगे ज़िम्मेदार! शिक्षा विभाग के आदेशों पर गरमाई एमपी की सियासत, क्या ऐसे में प्रदेश की शिक्षा का स्तर हो पाएगा मजबूत?

मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग के नए आदेश को लेकर विवाद बढ़ गया है। अब प्रिंसिपल और हेडमास्टर को जर्जर स्कूल भवनों की पहचान, गिराने और मलबे की नीलामी तक की जिम्मेदारी दी गई है।

Shah Mat Madhya Pradesh : जर्जर स्कूल का भार, शिक्षक होंगे ज़िम्मेदार! शिक्षा विभाग के आदेशों पर गरमाई एमपी की सियासत, क्या ऐसे में प्रदेश की शिक्षा का स्तर हो पाएगा मजबूत?

Shah Mat Madhya Pradesh / Image Source : IBC24 / FILE

Modified Date: March 13, 2026 / 12:12 am IST
Published Date: March 12, 2026 11:51 pm IST
HIGHLIGHTS
  • एमपी में शिक्षकों को जर्जर स्कूल भवन गिरवाने की जिम्मेदारी।
  • शिक्षा विभाग के आदेश पर सियासत गरमाई।
  • कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप।

भोपाल : Shah Mat Madhya Pradesh एक फिल्म का मशहूर डायलॉग है— “क्या मैं बोतल से निकला हुआ जिन्न हूँ… जो एक के बाद एक काम देते ही जा रहे हो?” कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का है।जहां एक ओर उच्च शिक्षा विभाग ने गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी के कुलसचिव को पत्र लिखकर आवारा पशुओं और कुत्तों की रोकथाम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश जारी किया है, वहीं दूसरी ओर जिला शिक्षा केंद्र जबलपुर ने नया फरमान जारी किया है।

शिक्षा विभाग के आदेशों पर एमपी की सियासत गरमाई

नए फरमान के मुताबिक अब स्कूलों के प्रिंसिपल और हेडमास्टर जर्जर स्कूल भवनों की पहचान से लेकर उन्हें गिरवाने और मलबे की नीलामी तक का काम करेंगे।इस आदेश से शिक्षक संघ नाराज हैं, तो स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी शिक्षकों के सहयोगात्मक रवैये की बात कर रहे हैं। Shah Mat Madhya Pradesh  अब शिक्षा विभाग के आदेशों पर एमपी की सियासत भी गरमा गई है।कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था चौपट करने का आरोप लगाया है, वहीं बीजेपी ने इसे व्यवस्था की रूटीन प्रक्रिया बताते हुए कमलनाथ सरकार की याद दिलाई।

शिक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?

कांग्रेस और बीजेपी में शिक्षा व्यवस्था के सच्चे कर्णधार होने को लेकर वार-पलटवार जारी है। Shah Mat Madhya Pradeshलेकिन सवाल यह है कि क्या अब शिक्षकों, प्राचार्यों और कुलपतियों के पास यही काम बचे हैं जर्जर भवन गिरवाने से लेकर आवारा कुत्तों को हटवाने तक की व्यवस्था संभालना? सवाल यह भी है कि अगर सरकारी शैक्षणिक संस्थान शिक्षा की बजाय ऐसे तमाम काम संभालेंगे, तो शिक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ऐसे में कभी प्रदेश की शिक्षा का स्तर बढ़ पाएगा?

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लेखक के बारे में

I’m Sneha Singh, a journalist and news producer at IBC24. A Gold Medalist in Journalism and Mass Communication, I specialize in news production, content writing, and digital storytelling. With a keen interest in political and crime reporting, I believe in delivering accurate, ethical, and impactful journalism that informs and connects with people.