चुनावी रण.. ‘कितने विभीषण’? भितरघातियों ने बढ़ाई भाजपा और कांग्रेस की टेंशन

चुनावी रण.. 'कितने विभीषण'? भितरघातियों ने बढ़ाई भाजपा और कांग्रेस की टेंशन : Breachers increased the tension of BJP and Congress

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  • Publish Date - July 5, 2022 / 11:24 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:46 PM IST

(रिपोर्टः नवीन कुमार सिंह) भोपालः पहले चरण के मतदान को शुरू होने में महज कुछ घंटे का बाकी है..ये रात दोनों दलों के प्रत्याशियों के लिए बड़ी भारी होने वाली है और इनकी टेंशन दोगुना करने के लिए बागी और भितरघाती लगातार सक्रिय है। कांग्रेस इन बागियों पर लगाम लगाने के लिए कुछ हद तक तो सफल रही है लेकिन परेशान वो भी हैं। उधर बीजेपी को चुनाव से ठीक एक दिन पहले इन भितरघातियों को कड़ी हिदायत देनी पड़ी…मुकाबला कांटे का इस लिए संदेश देना भी ज़रुरी है। कांग्रेस ने हर बूथ पर ट्रेंड प्रोफेशनल्स की डयूटी लगा रखी है। यानी दोनों ही दल कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते।>>*IBC24 News Channel के WhatsApp  ग्रुप से जुड़ने के लिए  यहां Click करें*<<

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निकाय चुनाव में बीजेपी-कांग्रेस को बागियों के साथ-साथ भितरघातियों ने बड़ा झटका दिया है. खास तौर पर चाल, चरित्र, चेहरा और अनुशासन की बात करने वाली बीजेपी में अनुशासन की खुलकर धज्जियां उड़ी। बीजेपी अब तक 700 छोटे-बड़े पदाधिकारियों को पार्टी से बाहर कर चुकी है। लेकिन पार्टी में रहकर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ काम करने वालों को हाईकमान अब सबक सिखाने के मूड में है। वोटिंग के 24 घंटे पहले प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने जिलाध्यक्षों को भितरघातियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जाहिर है बीजेपी कार्रवाई कर दूसरे चरण के चुनाव वाले शहरों के भितरघातियों को संदेश देना चाहती है।

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वैसे भितरघातियों की चुनौती से केवल बीजेपी ही नहीं बल्कि कांग्रेस भी जूझ रही है। इनसे छुटकारा पाने कांग्रेस ने ट्रेंड प्रोफेशनल्स की मदद लेनी शुरु कर दी है। कांग्रेस को ये भी डर है कि बीजेपी प्रशासन की मदद से वोटिंग के वक्त गड़बड़ी कर सकती है। लिहाजा पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ ने अपने ट्रेंड प्रोफेशनल्स को हर बूथ पर तैनात कर दिया है। जो वोटिंग और काउंटिंग में होने वाली हेराफेरी को एक्सपोज़ करेंगे।

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निकाय के दंगल को 2023 का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ऐसे में बीजेपी-कांग्रेस कतई नहीं चाहती कि भितरघातियों की वजह से उसका खेल बिगड़े। अब सवाल है कि अगर ऐन चुनाव से पहले इन विभीषणों पर कार्रवाई का डंडा चलता है तो पार्टी को फायदा होगा या फिर नुकसान?