दूषित पेयजल मामला: अदालत में पेश स्थिति रिपोर्ट में सात मौतों का जिक्र, बीमारी का खुलासा नहीं

दूषित पेयजल मामला: अदालत में पेश स्थिति रिपोर्ट में सात मौतों का जिक्र, बीमारी का खुलासा नहीं

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  • Publish Date - January 15, 2026 / 10:14 PM IST,
    Updated On - January 15, 2026 / 10:14 PM IST

इंदौर, 15 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को स्थिति रिपोर्ट पेश करते हुए शहर के भागीरथपुरा इलाके में उल्टी-दस्त प्रकोप के दौरान पांच माह के बालक समेत सात लोगों की मौत का जिक्र किया है।

हालांकि, 158 पन्नों की इस रिपोर्ट में स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया है कि इन लोगों की मौत किस बीमारी के कारण हुई।

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से लोगों की मौत को लेकर दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई कर रही है।

शहर के एक अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) की ओर से अदालत में पेश स्थिति रिपोर्ट में भागीरथपुरा क्षेत्र में गत 28 दिसंबर से 12 जनवरी के बीच उर्मिला (60), तारा (65), नंदलाल (70), हीरालाल (65), पांच माह के बालक अव्यान, अरविंद निखार (43) और भगवान भामे (73) की मौत का जिक्र किया गया है।

रिपोर्ट में उर्मिला, तारा, नंदलाल और भामे के बारे में कहा गया है कि उनकी मौत इलाज के दौरान हुई, जबकि हीरालाल के बारे में बताया गया है कि उसे शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) में मृत हालत में लाया गया।

रिपोर्ट में पांच माह के बालक अव्यान और 43 वर्षीय निखार की मौत का कारण ‘अज्ञात’ बताया गया है। इस सिलसिले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के पेश ब्योरे में सभी सात लोगों की ‘‘मौत के कारण’’ के कॉलम में किसी भी बीमारी का उल्लेख नहीं किया गया है।

बहरहाल, एक याचिकाकर्ता के वकील विभोर खंडेलवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के एक वकील की ओर से भागीरथपुरा में करीब 23 लोगों की मौत का मौखिक रूप से जिक्र किया गया और उसने स्वीकार किया कि इनमें से 15 लोगों की मौत दूषित पानी पीने से हुई है।

उच्च न्यायालय के छह जनवरी के निर्देशों के आधार पर सूबे के मुख्य सचिव अनुराग जैन ऑनलाइन माध्यम से अदालत के सामने हाजिर हुए।

जैन ने उच्च न्यायालय को बताया कि उसके निर्देशों के मुताबिक भागीरथपुरा के लोगों को टैंकरों के जरिये स्वच्छ पेयजल मुहैया कराया जा रहा है।

मुख्य सचिव ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल वाले स्त्रोतों की पहचान के बाद इन्हें बंद करके इनके पानी का उपयोग रोक दिया गया है जिनमें 51 नलकूप शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इन दूषित जल स्त्रोतों का ‘क्लोरीनीकरण’ और अन्य तरीकों से उपचार किया जा रहा है।

मुख्य सचिव ने उच्च न्यायालय को यह भी बताया कि भागीरथपुरा में घर-घर सर्वेक्षण करके करीब 1.62 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई है।

उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के बाद 440 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया जिनमें से 411 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है और 29 रोगी अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं।

मुख्य सचिव ने बताया कि इन सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर किया जा रहा है।

जैन ने उच्च न्यायालय को बताया कि भागीरथपुरा में अलग-अलग जगहों पर पेयजल की शुद्धता की जांच की जा रही है और इस इलाके में जलापूर्ति के लिए नयी पाइपलाइन बिछाने के ठेके दिए गए हैं।

राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम ने दूषित पेयजल मामले में अदालत में रिपोर्ट पेश की।

उच्च न्यायालय ने कहा कि सभी याचिकाकर्ताओं के वकीलों को इन रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं और ये वकील इन पर अपना जवाब 19 जनवरी तक दाखिल कर दें।

अदालत ने याचिकाओं पर अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की और राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह इस तारीख को भी ऑनलाइन माध्यम से अदालत के सामने हाजिर रहें।

स्थानीय नागरिकों ने भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप में 23 मरीजों के दम तोड़ने का दावा किया है।

इस बीच, शहर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की एक समिति के किए गए ‘डेथ ऑडिट’ की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा के 15 लोगों की मौत इस प्रकोप से किसी न किसी तरह जुड़ी हो सकती है।

भाषा हर्ष खारी

खारी