जबलपुर, दो अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक एवं खनन कारोबारी संजय पाठक के खिलाफ कथित अवैध खनन मामले में न्यायाधीश से संपर्क करने के प्रयास को लेकर आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने पाठक की आपत्तियों को खारिज करते हुए इस संबंध में दायर याचिका का निपटारा कर दिया।
याचिकाकर्ता कटनी के अशुतोष दीक्षित के वकील अरविंद श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा से फोन पर संपर्क करने की पाठक की कार्रवाई को अवमाननापूर्ण माना।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष सितंबर में न्यायमूर्ति मिश्रा ने कथित अवैध खनन से जुड़े एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने तब कहा था कि पाठक ने ‘‘इस विशेष मामले पर चर्चा’’ के लिए उन्हें फोन करने का प्रयास किया, इसलिए वह इस याचिका की सुनवाई के लिए इच्छुक नहीं हैं।
दीक्षित ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि भाजपा विधायक से जुड़ी तीन कंपनियां जबलपुर जिले के सिहोरा क्षेत्र तथा वन भूमि में ‘‘अवैध और अधिक खनन’’ में संलिप्त हैं।
श्रीवास्तव के अनुसार, उनके मुवक्किल का कहना है कि पूर्व मंत्री पाठक द्वारा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से संपर्क करना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।
उन्होंने बताया कि न्यायमूर्ति मिश्रा ने मामले को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया था।
दीक्षित का आरोप है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायतें की थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने विजय राघवगढ़ (कटनी) से विधायक पाठक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया।
भाषा सं दिमो
राजकुमार
राजकुमार