MP News: भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों के योगदान पर मंथन, भोपाल में जुटे कई दिग्गज, राज्यपाल बोले- इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी

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भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों के योगदान पर मंथन, भोपाल में जुटे कई दिग्गज, Discussion on contribution of private universities

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 05:30 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 05:30 PM IST

भोपाल। MP News: निजी विश्वविद्यालय संघ मध्य प्रदेश एवं मध्य प्रदेश शासन के अधीन विनियामक आयोग के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों का योगदान” विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में किया गया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी, हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक अशोक कडैल तथा निजी विश्वविद्यालय संघ मध्य प्रदेश के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल सहित प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, निदेशक, डीजी, विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ शिक्षाविद् उपस्थित रहे।

MP News: कार्यक्रम के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा भारत की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत की आधारशिला है। निजी विश्वविद्यालय इस समृद्ध परंपरा के संरक्षण, संवर्धन तथा आधुनिक शिक्षा के साथ उसके समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल हमारा गौरवशाली अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को दिशा देने वाली जीवंत परंपरा है। इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम, शोध और नवाचार से जोड़कर विद्यार्थियों को भारतीय दृष्टिकोण के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सकता है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और समाज के विकास का व्यापक दर्शन समाहित है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से इस समृद्ध परंपरा को शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी रूप से स्थापित किया जा रहा है।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास और राष्ट्र निर्माण की चेतना विकसित करना भी है, जिसकी मजबूत आधारशिला भारतीय ज्ञान परंपरा में मौजूद है। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों एवं शिक्षाविदों ने भी भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान विरासत को केवल पुस्तकों और परंपराओं तक सीमित न रखते हुए आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक, प्रबंधन एवं सामाजिक विकास के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

इस अवसर पर हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित “भारतीय ज्ञान परंपरा” पुस्तक अतिथियों को भेंट की गई। इसे भारतीय ज्ञान, दर्शन, संस्कृति एवं परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों से 200 से अधिक गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। इनमें प्रदेश के अनेक कुलपति, निदेशक, डीजी, एचओडी, वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल रहे। कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. अजीत सिंह पटेल, सचिव, निजीविश्वविद्यालय संघ, भोपाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षाविदों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम ने इस विचार को मजबूती प्रदान की कि भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे आधुनिक शिक्षा, शोध और नवाचार का अभिन्न हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है। इस दिशा में मध्य प्रदेश के निजी विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण एवं नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकते हैं।