भोपाल, 16 सितंबर (भाषा) भोपाल में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) को भोज वेटलैंड (आर्द्रभूमि) से संबंधित अतिक्रमण के मुद्दों के खिलाफ एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
एमपीपीसीबी की ओर से पेश वकील ने अंतरिम रिपोर्ट दाखिल की और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा।
नमभूमि स्थल यानी वेटलैंड, पर्यावरण और जैवविविधता के संरक्षण के साथ ही मानव कल्याण से सीधे रूप में जुड़े हुए संरक्षित स्थल है। भोज वेटलैंड भोपाल शहर में स्थित दो झीलें हैं।
अधिकरण ने निर्देश दिया कि विस्तृत रिपोर्ट पूरी की जाए और सूचीबद्ध होने की अगली तारीख से पहले दाखिल की जाए।
एनजीटी इस मुद्दे पर आर्या श्रीवास्तव द्वारा भारत संघ और अन्य के साथ-साथ राशिद नूर खान बनाम भोपाल कलेक्टर और अन्य के खिलाफ दायर मूल आवेदन पर सुनवाई कर रहा था।
ये मामले पूर्ण टैंक स्तर (एफटीएल)/पूर्ण जलाशय स्तर (एफआरएल) के संदर्भ में संबंधित क्षेत्रों के सीमांकन सहित भोज वेटलैंड और जल निकायों पर अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों से संबंधित हैं।
सुनवाई के दौरान, अधिकरण ने सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका के बारे में कड़ी टिप्पणियां कीं।
अधिकरण ने न केवल अवैध अतिक्रमण और निर्माण में शामिल व्यक्तियों को जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया, बल्कि उन अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराए जाने की बात कही, जिनकी निष्क्रियता या लापरवाही इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती है।
अधिकरण ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया जा सकता है।
एनजीटी ने सार्वजनिक भूमि, वन भूमि, जल निकायों और वेटलैंड पर अतिक्रमण पर चिंता जताई और इसे हटाने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम के महत्व पर जोर दिया।
अधिकरण ने मार्च 2025 में प्रकाशित पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संकलित आंकड़ों का भी उल्लेख किया, जो वन भूमि पर अतिक्रमण से संबंधित है।
एनजीटी ने अगली सुनवाई के लिए छह अक्टूबर की तारीख तय की।
भाषा ब्रजेन्द्र गोला
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