Gujarat’s ‘Prostitute Village’ News: ‘7 साल की उम्र में सगाई या तो देह व्यापार…खुद ​परिवार के मर्द तलाशते हैं ग्राहक’, कांप उठेगी राजधानी से 200 किलोमीटर दूर इस गांव की बेटियों की दर्दभरी कहानी सुनकर

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Gujarat's 'Prostitute Village' News: '7 साल की उम्र में सगाई या तो देह व्यापार...खुद ​परिवार के मर्द तलाशते हैं ग्राहक', कांप उठेगी राजधानी से 200 किलोमीटर दूर इस गांव की बेटियों की दर्दभरी कहानी सुनकर

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  • Publish Date - September 20, 2026 / 04:50 PM IST,
    Updated On - September 20, 2026 / 05:13 PM IST

Gujarat's 'Prostitute Village' News: '7 साल की उम्र में सगाई या तो देह व्यापार...खुद ​परिवार के मर्द तलाशते हैं ग्राहक', कांप उठेगी राजधानी से 200 किलोमीटर दूर इस गांव की बेटियों की दर्दभरी कहानी सुनकर / Image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • कम उम्र में बेटियों की सगाई
  • गांव में 2012 से सामूहिक विवाह और सगाई समारोह
  • कुछ बेटियां अब शिक्षा और अन्य रोजगार के विकल्पों की ओर बढ़ रही

वाडिया:  Gujarat’s ‘Prostitute Village’ News:  बचपन में ‘सगाई’ या देह व्यापार…गुजरात के वाडिया गांव में कई बच्चियों के सामने मानो जीवन की राह इन्हीं दो विकल्पों के बीच सिमटकर रह गई है। देह व्यापार से जुड़ी अपनी पुरानी पहचान का बोझ ढो रहे इस गांव में यह किसी गुजरे दौर की कहानी नहीं, बल्कि आज की हकीकत है। यहां कई परिवार अपनी बेटियों को उस दलदल से बचाने की कोशिश में महज सात साल की उम्र में उनकी सगाई कर देते हैं, जिसमें पीढ़ियों से उनके परिवार की महिलाएं फंसती रही हैं।

7 साल की उम्र में सगाई या तो देह व्यापार…

Gujarat’s ‘Prostitute Village’ News:  अहमदाबाद से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित वाडिया उस भारत से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है, जहां लैंगिक समानता, शिक्षा और बेहतर भविष्य की आकांक्षाओं की बात होती है। यहां की महिलाएं उन भूमिकाओं की बेड़ियां तोड़ने के लिए संघर्ष कर रही हैं, जिन्हें इतिहास और सामाजिक परिस्थितियों ने पीढ़ियों से उनपर थोप रखा है। परंपरागत रूप से घुमंतू समुदाय के इस गांव में महिलाओं को दशकों से देह व्यापार में धकेला जाता रहा है, जबकि परिवार के पुरुष उनके लिए ‘ग्राहक’ तलाशने का काम करते रहे हैं। यह सिलसिला आज भी पूरी तरह थमा नहीं है।

कम उम्र में सगाई को एक तरह का सुरक्षा कवच

बनासकांठा जिले के करीब 750 लोगों की आबादी वाले इस गांव के कुछ पुरुष हर सुबह पालनपुर-थराद राजमार्ग जाते हैं। वे वहां काम की तलाश में नहीं जाते, बल्कि ट्रक चालकों, राहगीरों और आसपास के गांवों एवं शहरों से आने वाले पुरुषों को अपने गांव की महिलाओं के लिए ‘‘ग्राहक बनाने’’ की कोशिश करते हैं। भारत में बाल विवाह कानूनी रूप से प्रतिबंधित है, लेकिन वाडिया में कई परिवार अपनी बेटियों की कम उम्र में सगाई को एक तरह का सुरक्षा कवच मानते हैं- एक ऐसा रास्ता, जिससे वे शादी के बाद गांव से बाहर जा सकें और देह व्यापार में धकेले जाने से बच जाएं। विडंबना यह है कि एक कुप्रथा से बचने के लिए परिवारों को दूसरी सामाजिक बुराई का सहारा लेना पड़ रहा है।

गांव में पली-बढ़ी 19-वर्षीय एक युवती इस अंतर्विरोध की कहानी अपने भीतर समेटे है। उसकी मां और दादी देह व्यापार से जुड़ी रही हैं, लेकिन वह अब गांव से दूर एक कॉलेज में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। अब उसकी शादी हो चुकी है। उसका विवाह जब तय हुआ था, उस समय उसकी आयु महज 11 साल थी। युवती ने अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बचपन से मैंने अपने पिता और रिश्तेदारों को अपनी मां और दादी के लिए पुरुष ‘ग्राहकों’ को लाते देखा। मेरी मां ने मुझे बताया था कि ऐसा नहीं था कि उन्हें जबरन इसमें धकेला गया था। गरीबी के कारण यह यहां की सामान्य व्यवस्था बन गई थी और हर कोई उसी के अनुसार चलता था। इस वजह से मेरी मां को यह भी पक्के तौर पर नहीं पता कि जिन्हें मैं अपना पिता मानती हूं, वही मेरे जैविक पिता हैं।’’

11 साल की उम्र में सामूहिक समारोह में सगाई

युवती ने कहा, ‘‘लेकिन मेरी मां ने तय किया कि वह मुझे इस रास्ते पर नहीं जाने देंगी। मेरी 11 साल की उम्र में सामूहिक समारोह में सगाई कर दी गई और 18 साल की उम्र में मेरी शादी हुई।’’ यह किसी एक लड़की की कहानी नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ परिवारों की पहल पर सात से 12 साल तक की लड़कियों की आसपास के गांवों या रिश्तेदारी में बाकायदा सगाई कराई जाती है। गांव में एक तरह का अलिखित नियम बन चुका है कि जिन लड़कियों की सगाई या शादी हो गई है, उन्हें देह व्यापार में नहीं धकेला जाएगा। चंद्रा सरानिया नाम की एक महिला ने कहा, ‘‘जब मैंने अपनी बेटी की शादी कराने की बात कही तो मुझसे कहा गया कि यहां की लड़कियों की यही नियति है और मुझे इसके खिलाफ नहीं जाना चाहिए। मैंने अपनी बेटी की 12 साल की उम्र में सगाई कर दी और 18 साल की उम्र में उसकी शादी हो गई।’’

चंद्रा को महज 15 साल की उम्र में देह व्यापार में धकेल दिया गया था। अब वह एक छोटी डेरी चलाती है। सरकार ने उसके परिवार को 1963 में खेती के लिए जमीन आवंटित की थी, लेकिन गांव में सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण खेती आजीविका का भरोसेमंद साधन नहीं बन सकी और चंद्रा को देह व्यापार में शामिल होना पड़ा। चंद्रा ने इसी कमाई से अपने तीन बच्चों- दो बेटों और एक बेटी- की परवरिश की, लेकिन उसने मन में ठान लिया था कि उसका अतीत उसके बच्चों, खासकर बेटी, के भविष्य की दिशा तय नहीं करेगा।

हर साल विवाह या सगाई समारोह आयोजित किए जा रहे

गांव में 2012 में उस समय बदलाव की किरण दिखाई दी, जब गैर-सरकारी संगठनों ने कुछ परिवारों को अपनी बेटियों को देह व्यापार में नहीं धकेलने के लिए राजी किया और गांव में पहली बार सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया। तब से वाडिया में हर साल इस तरह के विवाह या सगाई समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। गैर-सरकारी संगठन ‘विचरता समुदाय समर्थन मंच’ (वीएसएसएम) की संस्थापक मित्तल पटेल ने कहा कि परिवारों को अपनी बेटियों को देह व्यापार में न धकेलने के लिए राजी करना आसान नहीं था, लेकिन लगातार कोशिशों से बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि सगाई के बाद लड़के का परिवार भी लड़की की सुरक्षा को लेकर सजग हो जाता है और इससे कम उम्र की लड़कियों को देह व्यापार में धकेले जाने से रोकने में मदद मिली है।

पटेल के अनुसार, कुछ कार्यकर्ताओं को आशंका है कि कम उम्र में सगाई कराने की यह व्यवस्था बाल विवाह को बढ़ावा दे सकती है, लेकिन देह व्यापार में धकेले जाने और सम्मानजनक जीवन की संभावना से वंचित रह जाने की तुलना में ऐसी सगाई परिवारों को बेहतर विकल्प नजर आती है। वाडिया की यह कहानी केवल आज की परिस्थितियों की नहीं है। इसका एक सिरा इतिहास और लोककथाओं से भी जुड़ा है। लोककथाओं के अनुसार, सरानिया समुदाय एक घुमंतू जनजाति है, जो कभी मेवाड़ के महाराणा प्रताप की सेना के साथ चलता था। पुरुष ढाल और तलवार जैसे हथियारों की धार तेज करते थे जबकि महिलाएं सैनिकों का मनोरंजन करती थीं। कहा जाता है कि 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद सरानिया समुदाय के लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया और दूसरे विकल्पों के अभाव में कई परिवारों ने देह व्यापार का सहारा लिया। दशकों बाद वाडिया बदलाव की ओर बढ़ तो रहा है, लेकिन अतीत की परछाइयां अब भी उसका पीछा कर रही हैं।

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Gujarat's 'Prostitute Village' News में वाडिया गांव क्यों चर्चा में है?

वाडिया गांव की चर्चा वहां देह व्यापार से जुड़ी पुरानी सामाजिक समस्या और उससे बाहर निकलने के लिए कुछ परिवारों और सामाजिक संगठनों द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर है।

Gujarat's 'Prostitute Village' News के अनुसार लड़कियों की कम उम्र में सगाई क्यों की जाती है?

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ परिवार कम उम्र में सगाई को बेटियों को देह व्यापार में धकेले जाने से बचाने के एक तरीके के रूप में देखते हैं। हालांकि, कम उम्र में सगाई भी बाल अधिकारों और कानून से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है।

क्या वाडिया में कम उम्र में सगाई कानूनी है?

भारत में बाल विवाह कानूनन प्रतिबंधित है। इसलिए किसी नाबालिग की शादी या उससे जुड़ी व्यवस्था कानूनी प्रावधानों के दायरे में आती है और उम्र संबंधी नियमों का पालन जरूरी है।

Gujarat's 'Prostitute Village' News में 2012 का क्या महत्व है?

रिपोर्ट के अनुसार, 2012 में गैर-सरकारी संगठनों की पहल से वाडिया में पहली बार सामूहिक विवाह समारोह आयोजित हुआ। इसके बाद हर साल विवाह या सगाई से जुड़े समारोह आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है।

वाडिया गांव में बदलाव के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक संगठन परिवारों को बेटियों को देह व्यापार में न धकेलने के लिए जागरूक कर रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षा, विवाह और वैकल्पिक आजीविका के जरिए परिवारों को दूसरे रास्ते अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।