Gwalior Dog Sterilization Scam : स्टाम्प खरीदा किसी और ने, नाम लिखा किसी और का, कागजों में कर दी 656 कुत्तों की नसबंदी, 4 साल बाद खुली घोटाले की फाइल

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ग्वालियर में कुत्तों की नसबंदी के नाम पर कथित करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। 2022 में 656 कुत्तों की नसबंदी का दावा किया गया था, लेकिन जांच में शपथ पत्र फर्जी पाए गए। चार साल बाद नगर निगम ने मामला दर्ज कराया है।

  • Reported By: Nasir Gouri

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  • Publish Date - June 13, 2026 / 05:48 PM IST,
    Updated On - June 13, 2026 / 05:55 PM IST

Gwalior Dog Sterilization Scam / IMAGE SOURCE : screengrab

HIGHLIGHTS
  • 656 कुत्तों की नसबंदी का दावा, जांच में दस्तावेज फर्जी मिले।
  • शपथ पत्र में नाम एक डॉक्टर का, हस्ताक्षर और स्टाम्प दूसरे डॉक्टर के।
  • चार साल बाद FIR दर्ज, पुलिस ने संस्था और संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।

ग्वालियर: Gwalior Dog Sterilization Scamमध्य प्रदेश के ग्वालियर में कुत्तों की नसबंदी के नाम पर करोड़ों का घोटाला हो गया है। साल 2022 में 656 कुत्तों की नसबंदी का दावा, पर शपथ पत्र निकला फर्जी। स्टाम्प खरीदा डॉ. रविरमन ने, नाम लिखा डॉ. राघव का। कागज में नसबंदी हो गई, सड़क पर कुत्ते रोज 200 लोगों को काट रहे हैं। हांलकि ग्वालियर नगर निगम की आंख 4 साल बाद खुली है ओर FIR दर्ज कराई गयी है।

क्या वाकई 656 कुत्तों की नसबंदी हुई?

1 मार्च-अप्रैल 2022, छत्तीसगढ़ की दुर्ग की एनीमल केयर फाउंडेशन को ठेका मिला। दावा किया 2 महीने में 656 आवारा कुत्तों की नसबंदी कर दी गयी है। Gwalior Municipal Corporation FIR नगर निगम को शपथ पत्र दिया गया। डॉ. राघव पाराशर के नाम से। पर जब जांच हुई तो खुलासा हुआ। स्टाम्प पेपर खरीदा था, डॉ. रविरमन शर्मा ने, साइन भी उन्हीं के। यानी कागज पर नाम किसी और का, काम किसी और ने किया। सवाल क्या वाकई 656 कुत्तों की नसबंदी हुई? ग्वालियर में कुत्तों की नसबंदी घोटाले का गणित।

ग्वालियर में 55 हजार आवारा कुत्ते

Fake Affidavit Case Gwalior ग्वालियर नगर निगम नसबंदी पर हर साल 1 करोड़ से ज्यादा खर्च कर रहा है। फिर भी ग्वालियर में 55 हजार आवारा कुत्ते हैं। 2024 में 70 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए। JAH में ही नवंबर तक 22 हजार मरीज पहुंचे। रोज 150 से 200 केस आ रहे हैं। अगर 2022 में 656 कुत्तों की नसबंदी सही में हुई होती तो आज सड़कों पर इतना आतंक क्यों? कागज में नसबंदी, जमीन पर कुत्ते बढ़ते गए। वहीं पुलिस ने डॉक्टर्स ओर संस्था के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

4 साल तक फाइल क्यों दबी रही?

नियम है नसबंदी के बाद कुत्ते को उसी जगह छोड़ो और शपथ पत्र दो। पर यहां शपथ पत्र ही फर्जी। 2022 का घोटाला, शिकायत 2026 में, FIR अब दर्ज हुई। 4 साल तक फाइल क्यों दबी रही? किसने बचाया? जब नसबंदी के कागज ही फर्जी हैं तो कितने कुत्ते सच में पकड़े गए? कितनों का ऑपरेशन हुआ? हांलकि इन सवालों का जबाब ग्वालियर नगर निगम के पास जवाब नहीं है।

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