Hiranagar TI Suspended/Image Credit: AI
Hiranagar TI Suspended: इंदौर: हीरानगर थाना क्षेत्र में तोड़फोड़ और हमले के आरोपियों के हाथ पर बंधे कथित फर्जी पट्टे का विवाद अब पुलिस महकमे के अधिकारियों पर भारी पड़ने लगा है। मामले में तेजी से चली विभागीय जांच के बाद आखिरकार देर रात हीरानगर थाना प्रभारी सुशील पटेल पर गाज गिर गई है और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जोन-3 के डीसीपी अभिषेक रंजन ने टीआई सुशील पटेल के निलंबन की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की विस्तृत विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों और खामियों के आधार पर यह सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
दरअसल, कार में तोड़फोड़ और जानलेवा हमले के आरोप में गिरफ्तार बदमाश मयंक और शोभित का हीरानगर पुलिस ने जुलूस निकाला था। जुलूस के दौरान दोनों आरोपियों के हाथों में प्लास्टर यानी पट्टे बंधे हुए नजर आए। लेकिन कहानी तब पलट गई, जब जेल पहुंचने से ठीक पहले का एक वीडियो सामने आया। (Hiranagar TI Suspended) वीडियो में पीसीआर वैन में तैनात सिपाही जफर खान दोनों आरोपियों के हाथों से पट्टे खोलता दिखाई दिया। वीडियो वायरल होते ही पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए। सवाल ये उठा कि अगर आरोपियों के हाथ में मेडिकल कारणों से पट्टा बांधा गया था, तो जेल पहुंचने से पहले उसे क्यों खोला गया?
Hiranagar TI Suspended: मामला तूल पकड़ने के बाद जोन-3 डीसीपी अभिषेक रंजन ने पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच एडीसीपी जोन-3 ओमप्रकाश को सौंपी। जांच में एसीपी रुबिना मिजवानी, तत्कालीन टीआई सुशील पटेल, एसआई दिनेश त्रिपाठी समेत कई पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए। जांच टीम उस अस्पताल तक भी पहुंची, जहां दोनों आरोपियों का मेडिकल कराया गया था। मेडिकल रिकॉर्ड और पुलिस दस्तावेजों का मिलान किया गया। जांच का फोकस इस बात पर था कि आखिर आरोपियों के हाथ में पट्टा बांधने की सलाह किसने दी और इसके पीछे मेडिकल आधार क्या था।
जांच में टीआई स्तर पर गंभीर लापरवाही और अनियमितता सामने आने के बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने सुशील पटेल पर कार्रवाई का शिकंजा कस दिया। देर रात उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। फर्जी पट्टाकांड में अब टीआई पर गाज गिर चुकी है, (Hiranagar TI Suspended) लेकिन सवाल अभी भी कई हैं- आखिर आरोपियों के हाथ में पट्टे किसके निर्देश पर बांधे गए? मेडिकल रिकॉर्ड में इसकी क्या वजह दर्ज है? और जुलूस के दौरान पुलिस की निगरानी में ये पूरा खेल कैसे हुआ? इन सवालों के जवाब विभागीय जांच के बाद ही पूरी तरह साफ होंगे।
इन्हें भी पढ़ें:-