Rojgar Sahayak Regularization News: रोजगार सहायकों के आएंगे अच्छे दिन? हाईकोर्ट में आ सकता है अहम फैसला, सरकार के पास अपना जवाब पेश करने का अंतिम मौका
Rojgar Sahayak Regularization News: रोजगार सहायकों के आएंगे अच्छे दिन? हाईकोर्ट में आ सकता है अहम फैसला, सरकार के पास अपना जवाब पेश करने का अंतिम मौका
Rojgar Sahayak Regularization News: रोजगार सहायकों के आएंगे अच्छे दिन? हाईकोर्ट में आ सकता है अहम फैसला, सरकार के पास अपना जवाब पेश करने का अंतिम मौका / Image: IBC24 Customized
- 25 हजार रोजगार सहायकों के भविष्य पर बड़ा फैसला संभव
- जवाब नहीं देने पर एकपक्षीय आदेश जारी हो सकता है
- अन्य राज्यों की तर्ज पर नियमितीकरण की मांग
जबलपुर: Rojgar Sahayak Regularization News: लंबे इंतेजार के बाद आखिरकार आज रोजगार सहायकों की मांग पूरी हो सकती है। जी हां आज रोजगार सहायकों के नियमितीकरण की याचिका पर HC में सुनवाई होनी है। हाईकोर्ट ने सरकार को अपना जवाब पेश करने का अंतिम मौका दिया है। वहीं अगर सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया तो एक पक्षीय फैसला सुनाया जाएगा। बता दें कि ये मामला प्रदेश के 25 हजार रोजगार सहायकों से जुड़ा हुआ है। इनकी मांग है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रदेश के GRS कर्मचारियों को भी नियमित किया जाना चाहिए।
रोजगार सहायक होंगे नियमित
Rojgar Sahayak Regularization News: मिली जानकारी के अनुसार रोज़गार सहायकों की ओर से नियमितीकरण की मांग को लेकर लगाई गई याचिका पिछले दो साल से लंबित है। हाईकोर्ट की ओर से सरकार को कई बार जवाब पेश करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन अब तक कोई जवाब सामने नहीं आया है। वहीं, आज सरकार के पास जवाब पेश करने का अंतिम मौका है। अगर सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आता तो मामला एक पक्षीय हो जाएगा और रोजगार सहायकों को नियमित किए जाने का आदेश जारी किया जा सकता है।
सरकार आज पेश कर सकती है अपना जवाब
इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया था। जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार अपनी ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं करती है, तो न्यायालय एकपक्षीय फैसला लेने के लिए बाध्य होगा।
दो साल से लंबित है मामला
गौरतलब है कि प्रदेश के लगभग 25 हजार ग्राम रोजगार सहायकों ने याचिकाएं दायर कर अन्य राज्यों की तर्ज पर नियमितीकरण की मांग की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से कार्यरत हैं, इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। अब सभी की निगाहें 27 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोर्ट का रुख स्पष्ट हो सकता है।
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