भोपाल, 30 मार्च (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को कहा कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा लेकर राजनीति में आने वाले लोग लोकतांत्रिक मूल्यों और शासन व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
उन्होंने विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहा कि राजनीति में वही सफल हो सकते हैं जिनमें जनसेवा की भावना और अनुशासन हो।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जनप्रतिनिधियों को जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील, अध्ययनशील और पूर्ण समर्पित होना चाहिए। किसी भी समस्या में उनका व्यवहार और प्रबंधन कौशल उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है।’’
यादव ने कहा कि भारत में ऐतिहासिक रूप से जुड़े लोकतंत्र के संस्कारों और मूल्यों का ही परिणाम है कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी देश में लोकतंत्र पर आधारित व्यवस्थाएं सुगमता से संचालित होती रहीं जबकि अन्य पड़ोसी देशों का हाल सबके सामने है।
उन्होंने सभी को दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर समाज हित और विकास कार्यों के लिए कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस सम्मेलन में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार उपस्थित थे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 45 वर्ष तक की आयु के युवा विधायक शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र केवल पश्चिम की देन नहीं, बल्कि भारतीय राजनीतिक व्यवस्था का नैसर्गिक गुण है। भारत में सदैव मत भिन्नता को सम्मान दिया गया है और विचारों की अभिव्यक्ति को महत्व प्राप्त रहा है।
इस अवसर पर तोमर ने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाती है तथा युवा विधायक नागरिकों और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
तोमर ने कहा कि युवा जनप्रतिनिधि सामाजिक कुरीतियों जैसे जातिवाद, नशाखोरी और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
देवनानी ने विधायकों को जनता और शासन के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करने का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सामने लाने का प्रमुख लोकतांत्रिक मंच है।
मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि नेतृत्व किसी पद से नहीं आता, बल्कि इसकी शुरुआत कॉलेज से होती है लेकिन इस राज्य में छात्र संघ चुनाव बंद हो गए।
उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं। कॉलेज के समय युवाओं के अंदर सिस्टम से लड़ने की ऊर्जा होती है, वहां से सोच और बदलाव की शुरुआत होती है।
उन्होंने युवा विधायकों से कहा कि लोकतंत्र की जड़ें तभी मजबूत होंगी, जब देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था सशक्त रहेगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चुनाव जीतना कोई कला नहीं है, बल्कि जनता से दिल से जुड़ाव ही असली ताकत है और यदि जनप्रतिनिधि ईमानदारी से जनता के काम करें, तो उन्हें हार का सामना नहीं करना पड़ेगा।
भाषा
ब्रजेन्द्र रवि कांत