एल्गार मामला: एनआईए ने कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और वरवर राव की जमानत रद्द करने की मांग की

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एल्गार मामला: एनआईए ने कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और वरवर राव की जमानत रद्द करने की मांग की

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  • Publish Date - May 15, 2026 / 06:11 PM IST,
    Updated On - May 15, 2026 / 06:11 PM IST

मुंबई, 15 मई (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने शुक्रवार को यहां एक विशेष अदालत में अर्जी दायर करके एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में आरोपी कार्यकर्ताओं सुधा भारद्वाज और वरवर राव को मिली जमानत रद्द करने की मांग की। एजेंसी ने जमानत की शर्तों के उल्लंघन का हवाला दिया।

सुधा भारद्वाज को 2021 में तकनीकी आधार पर जमानत दी गई थी, जबकि राव को एक साल बाद जमानत दी गई।

जमानत देते समय, अदालत ने दोनों पर कई और शर्तें लगाई थीं जिसमें अदालत की अनुमति के बिना मुंबई नहीं छोड़ना, एनआईए को पासपोर्ट जमा कराना और मामले के बारे में मीडिया से बात नहीं करना शामिल था।

एनआईए ने मुख्य रूप से इस आधार पर उनकी जमानत रद्द करने की मांग की है कि वे इस साल 19 जनवरी को मुंबई प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे जो उनकी जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है।

कार्यक्रम के दो दिन बाद, प्रेस क्लब ने अपने तीन सदस्यों को निलंबित कर दिया था। अदालत ने दोनों आरोपियों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।

यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में एल्गार परिषद के सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़ा है, जिसके बारे में पुलिस का दावा है कि अगले दिन पुणे के बाहरी इलाके में कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी।

पुणे पुलिस ने शुरू में मामले की जांच की थी। उसने दावा किया था कि यह कार्यक्रम माओवादियों से कथित तौर पर जुड़े लोगों ने आयोजित किया था। पुलिस ने 8 जनवरी, 2018 को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की थी।

बाद में एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली, जिसमें एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को गिरफ्तार किया गया था। अधिकतर आरोपी अभी जमानत पर बाहर हैं।

भाषा वैभव नरेश

नरेश