मप्र : बरकतउल्ला विवि का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी

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मप्र : बरकतउल्ला विवि का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी

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  • Publish Date - June 4, 2026 / 02:29 PM IST,
    Updated On - June 4, 2026 / 02:29 PM IST

भोपाल, चार जून (भाषा) भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्ला के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक बुधवार को आयोजित की गई थी।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एस.बी. सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि नाम परिवर्तन का उद्देश्य क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत तथा परमार वंश के राजा भोज के बौद्धिक योगदान का सम्मान करना है।

उन्होंने बताया कि कार्यपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रस्ताव अंतिम निर्णय के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा।

सिंह ने कहा कि प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि राजा भोज का क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और ज्ञान परंपरा में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। साथ ही, भोपाल का प्राचीन नाम ‘भोजपाल’ माना जाता है, इसी आधार पर विश्वविद्यालय का नाम ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ रखने की अनुशंसा की गई है।

वर्ष 1988 में तत्कालीन भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली के सम्मान में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय रखा गया था।

मौलाना बरकतउल्ला भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में शामिल थे। उन्होंने विदेश में रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अभियान चलाया था और अमेरिका तथा कनाडा में प्रवासी भारतीयों द्वारा स्थापित गदर आंदोलन से भी जुड़े रहे थे। उनका निधन वर्ष 1927 में सैन फ्रांसिस्को में हुआ था।

सूत्रों के अनुसार, कार्यपरिषद की सदस्य डॉ. ताहिरा अब्बासी ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का वर्तमान नाम एक महान स्वतंत्रता सेनानी की स्मृति से जुड़ा है और इसे बदलना उचित नहीं होगा।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि नया नाम देना ही है तो इसके लिए अलग विश्वविद्यालय की स्थापना की जानी चाहिए।

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि सरकार जनभावनाओं के अनुरूप कार्य करती है और यह कदम क्षेत्र की संस्कृति तथा विरासत को सम्मान देने का प्रयास है।

वहीं, कांग्रेस की प्रदेश इकाई के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने नाम परिवर्तन के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को शैक्षणिक और प्रशासनिक चुनौतियों के समाधान पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पाठ्यक्रमों के शैक्षणिक सत्र प्रभावित हुए हैं और विभिन्न व्यवस्थागत समस्याएं बनी हुई हैं।

मध्यप्रदेश सरकार इससे पहले भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन, इस्लामनगर का नाम जगदीशपुर, नसरुल्लागंज का नाम भेरूंदा तथा होशंगाबाद का नाम नर्मदापुरम कर चुकी है।

वर्ष 1970 में भोपाल विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का परिसर लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और यह भोपाल-होशंगाबाद मार्ग पर स्थित है। विश्वविद्यालय का अधिकार क्षेत्र भोपाल, सीहोर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल और राजगढ़ सहित आठ जिलों तक विस्तारित है।

विश्वविद्यालय में कला, समाज विज्ञान, विज्ञान, वाणिज्य, विधि, शिक्षा, अभियांत्रिकी, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन तथा अन्य विषयों में अध्ययन और अध्यापन की व्यवस्था है।

भाषा दिमो

मनीषा खारी

खारी