मप्र: कंबोडिया से संचालित ‘व्हाट्सऐप’ खाते के जरिये निवेश के नाम पर ठगी, पांच लोग गिरफ्तार

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मप्र: कंबोडिया से संचालित ‘व्हाट्सऐप’ खाते के जरिये निवेश के नाम पर ठगी, पांच लोग गिरफ्तार

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  • Publish Date - April 17, 2026 / 05:30 PM IST,
    Updated On - April 17, 2026 / 05:30 PM IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), 17 अप्रैल (भाषा) इंदौर पुलिस ने कंबोडिया से संचालित ‘व्हाट्सऐप’ खाते के जरिये लोगों को जाल में फंसाकर निवेश के नाम पर चूना लगा रहे संगठित गिरोह का शुक्रवार को पर्दाफाश किया। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि इस गिरोह को भारत के अलग-अलग राज्यों में एक से दो प्रतिशत के कमीशन के आधार पर डमी खाते (म्यूल अकाउंट) उपलब्ध कराने वाले पांच लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) आनंद कलादगी ने संवाददाताओं को बताया कि आरोपियों की पहचान विशाल चौहान (25), गणेश राव (23), रश्मि रंजन (24), आशीष पंवार (41) और नैवेद्य सिरोंजा (20) के रूप में हुई है।

कलादगी ने बताया कि चौहान और राव महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते हैं, जबकि रश्मि रंजन ओडिशा का रहने वाला है और पंवार व सिरोंजा मध्यप्रदेश के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन ठगी गिरोह के सदस्यों को इंदौर के एक नागरिक को करीब 93 लाख रुपये का चूना लगाए जाने के मामले की जांच में मिले सुरागों के आधार पर गिरफ्तार किया गया।

डीसीपी ने बताया कि गिरोह सोशल मीडिया मंचों पर लोगों को शेयर बाजार में निवेश से मोटे मुनाफे का लालच देकर उन्हें पहले एक ‘व्हाट्सऐप’ ग्रुप से जोड़ता था, फिर उनसे एक डमी मोबाइल ऐप्लिकेशन डाउनलोड कराता था।

उन्होंने बताया, ‘‘इंदौर के शिकायतकर्ता ने गिरोह के जाल में फंसने के बाद इस ऐप्लिकेशन के जरिये करीब 93 लाख रुपये के शेयर खरीदे। उसे ऐप्लिकेशन पर लगभग चार करोड़ रुपये का फायदा दिखाया गया, लेकिन कई प्रयासों के बाद भी वह यह धन नहीं निकाल सका जिसके बाद उसने भंवरकुआं पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया।’’

कलादगी ने बताया कि पुलिस को जांच में पता चला कि गिरोह की ऑनलाइन ठगी की रकम भारत के अलग-अलग बैंक खातों में जाती है, जबकि निवेशकों को जाल में फंसाने के लिए इस्तेमाल ‘व्हाट्सऐप’ खाता कंबोडिया से संचालित हो रहा है।

उन्होंने बताया,‘‘हमें गिरोह के 20 से 25 डमी बैंक खाते मिले हैं। बैंकों से पत्राचार करके इन खातों से लेन-देन पर रोक लगा दी गई है और विस्तृत जांच जारी है।’’

भाषा हर्ष जितेंद्र

जितेंद्र