मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण संबंधी याचिकाओं पर उच्च न्यायालय में 27 अप्रैल से होगी नियमित सुनवाई

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मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण संबंधी याचिकाओं पर उच्च न्यायालय में 27 अप्रैल से होगी नियमित सुनवाई

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  • Publish Date - April 2, 2026 / 10:08 PM IST,
    Updated On - April 2, 2026 / 10:08 PM IST

जबलपुर (मध्यप्रदेश), दो अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित सभी याचिकाओं पर उच्च न्यायालय में 27 अप्रैल से तीन दिनों तक नियमित सुनवाई की जाएगी।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा तथा न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सभी पक्षकारों को नियमित सुनवाई के तीन दिन पहले तक याचिका से संबंधित सभी दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं।

युगलपीठ ने सभी संबंधित पक्षकारों के अधिवक्ताओं को निर्देश दिया है कि वे नियमित सुनवाई के दौरान उपस्थित रहें।

मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के पक्ष तथा विपक्ष में उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की गई हैं।

आरक्षण के खिलाफ दायर की गयी याचिकाओं की तरफ से बृहस्पतिवार को पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि उच्चतम न्यायालय ने तीन माह में संबंधित याचिकाओं के निराकरण करने के निर्देश दिये हैं जबकि डेढ़ माह का समय गुजर गया है।

ओबीसी आरक्षण मामले में मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने युगलपीठ को बताया कि उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के भेजी गयी दो ‘एसएलपी’ को ‘रिकॉल’ कर लिया है।

उन्होंने युगलपीठ को बताया कि उक्त दोनों ‘एसएलपी’ छत्तीसगढ़ से संबंधित थी, जो गलती से मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय को भेज दी गयी थी।

राज्य सरकार की तरफ से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की सहमति के बाद युगलपीठ ने 27 अप्रैल से तीन दिनों तक दोपहर 12.30 से नियमित सुनवाई के निर्देश दिए।

युगलपीठ ने कहा है कि आवश्यकता होने पर नियमित सुनवाई की अवधि को बढ़ाया जा सकता है।

युगलपीठ ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया है कि वे सुनवाई के दौरान उपस्थित रहें।

आरक्षण के खिलाफ दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा इंदिरा साहनी तथा मराठा आरक्षण के संबंध में दायर याचिकाओं में स्पष्ट कहा गया है कि आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए।

पक्ष में दायर की गयी याचिकाओं में आबादी के अनुपात में आरक्षण की मांग की गयी थी।

उच्च न्यायालय ने कुछ याचिकाओं की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद राज्य सरकार एवं अन्य पक्षकारों ने उच्चतम न्यायालय में इसी मुद्दे पर एसएलपी दायर की थी।

उच्चतम न्यायालय ने सभी एसएलपी को सुनवाई के लिए वापस उच्च न्यायालय भेज दिया था।

भाषा सं ब्रजेन्द्र राजकुमार

राजकुमार