मप्र : चंबल नदी में रेत खनन, गैर-पंजीकृत वाहनों को ईंधन की बिक्र पर प्रतिबंध

मप्र : चंबल नदी में रेत खनन, गैर-पंजीकृत वाहनों को ईंधन की बिक्र पर प्रतिबंध

मप्र : चंबल नदी में रेत खनन, गैर-पंजीकृत वाहनों को ईंधन की बिक्र पर प्रतिबंध
Modified Date: April 16, 2026 / 07:37 pm IST
Published Date: April 16, 2026 7:37 pm IST

मुरैना, 16 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश में मुरैना प्रशासन ने बृहस्पतिवार को चंबल नदी से रेत खनन और परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रशासन ने जिले में अवैध गतिविधियों और अपराध पर लगाम लगाने के लिए गैर-पंजीकृत वाहनों को ईंधन की बिक्री पर भी रोक लगा दी।

यह फैसला उच्चतम न्यायालय के क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर मध्यप्रदेश सरकार की खिंचाई करने के दो दिन बाद लिया गया।

प्रभारी कलेक्टर कमलेश कुमार भार्गव की अध्यक्षता में हुई टास्क फोर्स की बैठक में चंबल नदी से रेत खनन और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया।

भार्गव ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

संबंधित आदेश में कहा गया है कि मध्यप्रदेश विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) के जवानों को राजघाट, भानु, देवड़ा और स्कर्दा नहर तिराहे सहित प्रमुख स्थानों पर तैनात किया गया है, ताकि अवैध खनन और रेत के भंडारण या परिवहन को रोकने के लिए लगातार निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

भार्गव और पुलिस अधीक्षक (एसपी) समीर सौरभ ने पुलिस, खनन, वन विभाग और एसएएफ के अधिकारियों के साथ चिन्हित स्थानों का निरीक्षण किया और शिविर की व्यवस्था एवं परिचालन रणनीति की समीक्षा की।

प्रशासन ने निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में चंबल नदी से रेत खनन या परिवहन की अनुमति नहीं दी जाए, एसएएफ कर्मी चौबीसों घंटे नजर रखें और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अधिकारियों ने कहा कि अवैध गतिविधियों में शामिल वाहनों को तुरंत जब्त किया जाएगा और उनके मालिकों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएंगे।

एक अलग आदेश में प्रशासन ने पेट्रोल पंपों को पंजीकरण के बिना वाहनों को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी की बिक्री करने से रोक दिया।

आदेश में कहा गया है कि उल्लंघन करने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने कहा कि इस उपाय का उद्देश्य गैर-पंजीकृत वाहनों से जुड़े अपराधों पर लगाम लगाना है, जिनके पहचान विवरण के अभाव में जांच में बाधा पैदा होती है।

अधिकारियों ने बताया कि भार्गव की ओर से जारी आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत 15 अप्रैल से 14 जून तक लागू रहेगा।

उच्चतम न्यायालय ने 13 अप्रैल को मध्यप्रदेश में एक वनरक्षक की हत्या और रेत माफियाओं द्वारा राज्य को राजस्थान से जोड़ने वाले चंबल पुल की बुनियाद के इर्द-गिर्द रेत खनन को ‘‘चौंकाने वाली घटनाएं’’ और राज्य सरकार की ‘‘विफलता’’ करार दिया था।

न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मध्यप्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि या तो राज्य सरकार चंबल नदी पर अवैध खनन को रोकने में विफल रही है या ऐसा राज्य के अधिकारियों की मिलीभगत से किया जा रहा है।

पीठ ने कहा था, ‘‘वे पुल (की बुनियाद) की खुदाई कर रहे हैं और अगर पुल गिर जाता है, तो कौन जिम्मेदार होगा? तस्वीरें खुद ही सबकुछ बयां कर रही हैं।’’

भाषा

सं ब्रजेन्द्र पारुल

पारुल


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