इंदौर, छह अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश के इंदौर में सोमवार को सामने आए विवाद में एक महिला ने आरोप लगाया कि भीड़ ने करीब दो महीने पहले उसे ‘बच्चा चोर’ बताकर पीट दिया, जब वह बहुचर्चित शाहबानो बेगम प्रकरण पर किताब लिखने के इरादे से उनके परिजनों से मिलने शहर में आई थी।
पुलिस ने महिला के आरोप को झूठा करार देते हुए भीड़ द्वारा उसकी पिटाई की घटना से इनकार किया है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो में महिला कहते सुनाई पड़ रही है कि वह शाहबानो प्रकरण पर किताब लिखने के इरादे से उनके परिजनों से मिलने फरवरी में इंदौर आई थी।
इंदौर से बाहर रहने वाली महिला ने दावा किया कि शाहबानो के परिजनों ने प्रस्तावित किताब के अनुबंध के तहत उससे धनराशि की ‘अवास्तविक मांगें’ कीं और आपत्ति जताए जाने पर उसके साथ विवाद किया।
उसने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान एक व्यक्ति ने उसे ‘बच्चा चोर’ बताया जिसके बाद खजराना क्षेत्र में मौके पर जुटी भीड़ ने उसे पीट दिया और उसके साथ बदसलूकी की।
खजराना पुलिस थाने के प्रभारी मनोज सिंह सेंधव ने भीड़ द्वारा महिला की पिटाई के आरोपों को ‘असत्य’ करार दिया।
उन्होंने कहा,‘‘महिला और शाहबानो के परिजनों के बीच किताब के अनुबंध को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस मौके पर पहुंची थी। दोनों पक्षों ने समझौते के तहत पुलिस से कहा था कि वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं।’’
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने दावा किया कि विवाद के दौरान महिला पर ‘डेटा चोरी’ का आरोप लगाया गया था जिसे मौके पर मौजूद लोगों ने ‘बेटा चोरी’ समझ लिया था, नतीजतन कुछ देर के लिए भ्रम की स्थिति बन गई थी।
उन्होंने बताया कि आपसी समझौते के कारण महिला और शाहबानो के परिजनों की ओर से पुलिस थाने में एक-दूसरे के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई थी।
शाहबानो बेगम इंदौर की रहने वाली थीं। उन्होंने 1978 में अपने वकील पति मोहम्मद अहमद खान द्वारा तलाक दिए जाने के बाद उनसे गुजारा-भत्ता पाने के लिए स्थानीय अदालत में मुकदमा दायर किया था।
शाहबानो की लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने 1985 में इस महिला के पक्ष में फैसला सुनाया था। मुस्लिम संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने 1986 में मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम बनाया था। इस कानून ने शाहबानो प्रकरण में शीर्ष न्यायालय के फैसले को अप्रभावी बना दिया था।
वर्ष 1992 में शाहबानो का इंतकाल हो गया था।
भाषा
हर्ष रवि कांत