इंदौर, 26 मई (भाषा) मध्यप्रदेश कांग्रेस समिति ने अपने एक अध्ययन के हवाले से मंगलवार को दावा किया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में पेयजल के 90 प्रतिशत से ज्यादा नमूने दूषित पाए गए हैं।
विपक्षी दल ने कहा कि वह इस अध्ययन को लेकर तीन दिन में विस्तृत रिपोर्ट जारी करेगा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव में दम हो, तो वह इसे अदालत में चुनौती देकर दिखाएं।
कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जल संकट को लेकर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में सामने आई पेयजल त्रासदी के बाद कांग्रेस ने एक एजेंसी के माध्यम से शहर के अलग-अलग स्थानों से पानी के करीब 300 नमूने लिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने जांच के परिणामों का विशिष्ट ब्योरा दिए बगैर कहा, ‘‘जांच में इनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा नमूने जहरीले (दूषित) पाए गए हैं। विस्तृत जांच रिपोर्ट तीन दिन में सार्वजनिक की जाएगी।’’
पटवारी ने कहा कि शहर के महापौर भार्गव पेशे से वकील हैं और कांग्रेस उन्हें चुनौती देती है कि वह इस रिपोर्ट के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएं।
उन्होंने कहा, ‘‘महापौर में जरा भी इंसानियत और स्वाभिमान बचा हो, तो उन्हें इसी वक्त इस्तीफा दे देना चाहिए।’’
पटवारी ने जल संकट को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि नगर निगम से लेकर प्रदेश और केंद्र की सत्ता संभाल रहा दल इंदौर की जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसा रहा है।
स्थानीय लोगों और कांग्रेस ने भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त के प्रकोप में 36 लोगों की मौत का दावा किया है।
हालांकि, इस मामले पर चर्चा के दौरान विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई है और हर मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों की मौत के मामले की जांच कर रहा है।
उच्च न्यायालय ने आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करने के लिए 14 जून तक की मोहलत दी है।
भाषा हर्ष शोभना
शोभना