Dhirendra Shastri News/Image Source: IBC24
छतरपुरः Pandit Dhirendra Shastri News: पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने कुछ सेवादारों के व्यवहार और कार्यशैली को लेकर कड़ी नाराज़गी जताई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सेवा के नाम पर दिखावा और भौकाल की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो उचित नहीं है। पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कुछ सेवादारों की भाषा और व्यवहार बेहद घटिया हो गया है, जो सेवा की भावना के विपरीत है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कई सेवादार भक्तों से इस तरह पेश आते हैं, जैसे वे किसी सैन्य व्यवस्था में खड़े हों। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चाय से ज्यादा तो केतली गरम हो रही है। उनका कहना था कि कई चेले उनकी पीठ पीछे खुद को ही गुरु समझने लगे हैं।
Pandit Dhirendra Shastri News: उन्होंने कहा कि सेवा का मतलब सादगी, अनुशासन और विनम्रता है, लेकिन कुछ लोग यह सीख नहीं पा रहे हैं। शास्त्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कई सेवादारों का ध्यान सेवा पर कम और भौकाल बनाने पर ज्यादा रहता है। पं. धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि कुछ सेवादार “माल-पानी” के चक्कर में भी पड़ गए हैं। शास्त्री ने कहा कि कई चेले हमसे सादगी नहीं सीख पा रहे हैं। इनकी नजर सेवा पर नहीं, बाबा के भौकाल पर है। इन्हें लगता है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों से डायरेक्ट कनेक्शन है, इसलिए भौकाल है। सेवादारों को सेवा से नहीं, बल्कि गुरु के भौकाल से मतलब है।
दरबार के दौरान शास्त्री ने कहा कि कई लोग सेवा की भावना से नहीं, बल्कि अन्य कारणों से धाम से जुड़े हैं। आधे से ज्यादा सेवादार इसलिए बन गए, क्योंकि यहां ज्यादा माल-पानी है। कुछ लौंडे यहां लौंडियाबाजी के चक्कर में चेले बन गए। धाम में बालाजी की वजह से बच्चे-बच्चियां खिंचे चले आते हैं।