TMC Crisis Latest Updates: इस पार्टी में होगा TMC के बागी गुट का विलय, स्पीकर ओम बिरला से मिले 20 सांसद, NDA का कर सकते हैं समर्थन

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TMC Crisis Latest Updates Nationalist Citizens Party

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  • Publish Date - June 14, 2026 / 09:29 PM IST,
    Updated On - June 15, 2026 / 12:24 AM IST

TMC Crisis Latest Updates. Image Source- IBC24

नई दिल्ली: TMC Crisis Latest Updates: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रही बगावत रविवार को अपने चरम पर पहुंच गई, जब पार्टी के असंतुष्ट सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में अपने विलय की घोषणा कर दी। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बातचीत में बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि टीएमसी के दो-तिहाई लोकसभा सदस्यों ने एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है।

TMC Crisis Latest Updates: उन्होंने कहा, ‘टीएमसी के दो-तिहाई सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को अलग बैठने की व्यवस्था के लिए पत्र दिया है। हम नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का समर्थन करेंगे।’ टीएमसी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि असंतुष्ट खेमे ने पहले ही नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में अपना विलय कर लिया है, जिसे उन्होंने एक क्षेत्रीय दल बताया। ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी’ त्रिपुरा की एक कम प्रसिद्ध पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े के दावों के बारे में पूछे जाने पर बंदोपाध्याय ने कहा कि ‘असली टीएमसी’ कौन है, इसका फैसला अदालतें करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे पार्टी के चुनाव चिह्न ‘दो फूल’ (जोड़ा फूल) पर भी अपना दावा ठोकेंगे।बंदोपाध्याय ने कहा, ‘अदालत बाद में फैसला करेगी कि असली टीएमसी कौन है। हमने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर उनके समक्ष अपनी मांग रख दी है।’

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब टीएमसी नेता कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी रविवार को अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। उन्होंने टीएमसी लोकसभा संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा लिखा गया एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा, जिसमें उनसे किसी भी कथित अलग गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया गया है। इस पत्र में तर्क दिया गया है कि संविधान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर एक अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देता है। दस जून की तारीख वाले इस पत्र को पहले ईमेल के जरिए भी भेजा गया था, जिसमें कहा गया है कि दलबदल विरोधी कानून इस तरह के विभाजन की इजाजत नहीं देता।

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