सामाजिक सद्भाव भारतीय समाज का आंतरिक हिस्सा: मोहन भागवत

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सामाजिक सद्भाव भारतीय समाज का आंतरिक हिस्सा: मोहन भागवत

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  • Publish Date - January 3, 2026 / 09:06 PM IST,
    Updated On - January 3, 2026 / 09:06 PM IST

भोपाल, तीन जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि सामाजिक सद्भाव भारतीय समाज का आंतरिक हिस्सा है और इसे मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद तथा सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

वह यहां कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित एक सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित कर रहे थे।

संघ की ओर से जारी बयान में भागवत के हवाले से कहा गया कि आदिवासी और अन्य समुदायों के बीच भ्रम फैलाकर विभाजन पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि हजारों वर्षों से इस उपमहाद्वीप में रहने वाले लोगों का ‘डीएनए’ एक ही है।

आरएसएस प्रमुख ने निरंतर जुड़ाव और आपसी समझ की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मजबूत वर्गों को कमजोर वर्गों का साथ देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कानून समाज को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन सद्भावना ही समाज को वास्तव में जोड़ती है और बनाए रखती है।

भागवत ने कहा कि ‘विविधता में एकता’ भारत की मूल पहचान है और सामाजिक सद्भाव भारतीय समाज का स्वाभाविक गुण है।

बयान के अनुसार उन्होंने कहा, ‘‘हम बाहरी रूप से भिन्न दिखाई दे सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, संस्कृति और आध्यात्मिक स्वभाव के स्तर पर हम एक हैं।’’

उन्होंने हिंदू समाज को विविधता में एकता को आत्मसात करने वाला समाज बताया।

बैठक में आरएसएस के मध्य भारत क्षेत्र के 16 प्रशासनिक जिलों से विभिन्न सामाजिक समूहों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह बैठक दो सत्रों में आयोजित की गई।

पहले सत्र में आध्यात्मिक कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सामाजिक समूह अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्र के प्रति अपने योगदान पर भी विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की आलोचना के बावजूद संघ संयम के साथ राष्ट्रीय हित में कार्य करता रहता है।

मिश्रा ने धर्मांतरण के खिलाफ चेतावनी देते हुए इसे एक ‘‘गंभीर साजिश’’ बताया और कहा कि इसका प्रभाव न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है।

इससे पहले विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, आर्थिक सहायता और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी पहलों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

बयान में कहा गया कि बैठक का समापन इस प्रस्ताव के साथ हुआ कि समाज सरकारी हस्तक्षेप की प्रतीक्षा किए बिना सामूहिक प्रयासों से स्थानीय समस्याओं का समाधान करेगा। वक्ताओं ने पूरे समाज को मजबूत बनाने के लक्ष्य पर जोर दिया।

भाषा दिमो खारी

खारी