मप्र में हड़ताल का आंशिक असर, समर्थन में 25,000 असैन्य रक्षा कर्मचारी देर से काम पर पहुंचे

मप्र में हड़ताल का आंशिक असर, समर्थन में 25,000 असैन्य रक्षा कर्मचारी देर से काम पर पहुंचे

मप्र में हड़ताल का आंशिक असर, समर्थन में 25,000 असैन्य रक्षा कर्मचारी देर से काम पर पहुंचे
Modified Date: February 12, 2026 / 02:03 pm IST
Published Date: February 12, 2026 2:03 pm IST

भोपाल, 12 फरवरी (भाषा) केंद्र की नीतियों के खिलाफ श्रमिक संगठनों की ओर से बृहस्पतिवार को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मध्यप्रदेश में आंशिक असर देखने को मिला।

हालांकि, इस दौरान राज्य भर में रक्षा प्रतिष्ठानों में काम करने वाले 25,000 से अधिक असैन्य कर्मचारी इसके समर्थन और केंद्र की नीतियों के विरोध में एक घंटे की देरी से काम पर पहुंचे।

देश भर के विभिन्न श्रमिक संगठनों ने केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट नीतियों के विरोध में दिन भर की हड़ताल का आयोजन किया है।

अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (एआईडीईएफ) के अध्यक्ष एस एन पाठक ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि राज्य में छह आयुध कारखानों में तैनात 25,000 से अधिक असैन्य कामगार विरोध प्रदर्शन के तौर पर एक घंटे देरी से ड्यूटी पर पहुंचे।

उन्होंने कहा, ‘‘हम पूरी तरह से दिन भर की हड़ताल नहीं कर सके क्योंकि रक्षा उत्पादन और संबंधित कार्य आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आते हैं।’’

पाठक ने कहा कि श्रमिकों को सुबह आठ बजे अपनी ड्यूटी आरंभ करनी थी लेकिन इसके बजाय उन्होंने सुबह नौ बजे काम शुरू किया।

विभिन्न यूनियन से जुड़े श्रमिकों को मध्यप्रदेश में कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन करते और सरकार विरोधी नारे लगाते देखा गया। हालांकि राज्य भर में बाजार, स्कूल और कॉलेज खुले रहे।

हड़ताल का आह्वान करने वाले केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने दावा किया कि आंदोलन के लिए करीब 30 करोड़ श्रमिकों का समर्थन हासिल है।

राजधानी भोपाल स्थित प्रेस कॉम्प्लेक्स में भी श्रमिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए।

‘सेंटर ऑफ इंडिया ट्रेड यूनियंस’ के मध्यप्रदेश के महासचिव प्रमोद प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंकों, आयकर विभाग, बीमा क्षेत्र के कर्मचारियों और अन्य लोगों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

उन्होंने बताया कि सुबह भोपाल में सरकारी कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के गेट पर भी श्रमिकों ने प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम पूरे दिन विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन भोपाल कलेक्ट्रेट के पास रात 1.30 बजे शुरू होगा।’’

जबलपुर में सिविक सेंटर इलाके में विरोध रैली के लिए श्रमिक संगठनों से जुड़े लोग इकट्ठा होने लगे हैं।

श्रमिक संगठनों की तात्कालिक मांगों में चार श्रम संहिताओं एवं नियमों को रद्द करना, बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक तथा ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम’ को वापस लेना शामिल है।

श्रम संघ मनरेगा की बहाली और ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं।

संयुक्त मंच में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), स्वरोजगार महिला संघ (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) शामिल हैं।

भाषा ब्रजेन्द्र अमित सुरभि

सुरभि


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