मुख्य निर्वाचन आयुक्त के राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य होने पर आश्चर्य है : दिग्विजय

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मुख्य निर्वाचन आयुक्त के राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य होने पर आश्चर्य है : दिग्विजय

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  • Publish Date - June 18, 2026 / 05:49 PM IST,
    Updated On - June 18, 2026 / 05:49 PM IST

भोपाल, 18 जून (भाषा) अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बीच मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बृहस्पतिवार को आश्चर्य जताया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी इस ट्रस्ट के सदस्य हैं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी तरह जिन लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया है, वे सभी ट्रस्ट के कथित भ्रष्टाचार से सकते में हैं।

दिग्विजयन ने संवाददाताओं के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “राम मंदिर के मामले में हम सब लोग… जिन्होंने चंदा दिया है, वे आश्चर्यचकित हैं।

आश्चर्यचकित हैं कि किस तरह का भ्रष्टाचार वहां हुआ है।”

उन्होंने कहा, “हम यह भी देख रहे हैं कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस ट्रस्ट के सदस्य हैं। यह भी अजीब बात है।”

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में वित्तीय गड़बड़ी का मामला सात जून को सामने आया, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खबरों का हवाला देते हुए दावा किया कि राम मंदिर को चढ़ावे और चंदा के रूप में मिले करोड़ों रुपये गायब हैं।

अखिलेश ने अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान राशि की चोरी और वित्तीय कुप्रबंधन के आरोपों की जांच के लिए ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।

सरकार के अनुसार, ट्रस्ट ने तथ्यों का पता लगाने और राम मंदिर की छवि खराब करने के प्रयासों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

एसआईटी ने बुधवार को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ की। जांच टीम ने दान राशि की गिनती करने और ट्रस्ट का रिकॉर्ड रखने वाले लोगों से भी पूछताछ की।

इस विवाद के बाद तीन व्यक्तियों ने अलग-अलग थानों में शिकायत दर्ज कराई है, जिनमें मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है, लेकिन अब तक पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया है। मंदिर ट्रस्ट ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।

भाषा

ब्रजेन्द्र पारुल

पारुल