भुवनेश्वर, तीन जुलाई (भाषा) ओडिशा में डॉक्टरों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रहने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने के बीच राज्य सरकार ने उन्हें शनिवार को वार्ता के लिए आमंत्रित किया और काम पर लौटने की अपील की।
यह निमंत्रण ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (ओएमएसए) के पदाधिकारियों को ऐसे समय दिया गया है, जब एक दिन पहले ही डॉक्टरों ने सरकार की चेतावनी के बावजूद अपना आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया था। सरकार ने चेताया था कि हड़ताल में शामिल नियमित डॉक्टरों का वेतन रोका जा सकता है, जबकि संविदा और तदर्थ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष किशोर चंद्र मिश्रा को लिखे एक पत्र में कहा गया है, ‘‘स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री शनिवार दिन में 11 बजे अपने कक्ष में ओएमएसए की विभिन्न मांगों पर चर्चा करेंगे। आपसे अनुरोध है कि तय तारीख और समय पर बैठक में शामिल हों और सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करें।’’
ओएमएसए के बैनर तले लगभग 8,000 डॉक्टर बुधवार से ज़िला मुख्यालय अस्पतालों और उप मंडल व ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर काम बंद करके विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
आंदोलन कर रहे डॉक्टर कैडर पुनर्गठन, केबीके (कालाहांडी-बलांगीर-कोरापुट) एग्जिट पॉलिसी को लागू करने, तबादला नीति में पारदर्शिता, बीमा कवरेज, प्रोत्साहन राशि और केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की तर्ज पर समयबद्ध कैरियर प्रगति कार्यक्रम के फायदों की मांग कर रहे हैं।
मौजूदा नीति के तहत केबीके (कालाहांडी-बलांगीर-कोरापुट) क्षेत्र में तैनात डॉक्टरों के लिए तीन वर्ष तक सेवा देना अनिवार्य है। हालांकि, डॉक्टरों के संगठन का आरोप है कि निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद भी कई चिकित्सकों का तबादला नहीं किया जाता।
हड़ताल जारी रहने और स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग की ड्यूटी पर लौटने की अपील के बावजूद आंदोलन न थमने पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने बृहस्पतिवार को सभी स्वास्थ्य प्राधिकारों को हड़ताल में शामिल नियमित डॉक्टरों का वेतन रोकने का निर्देश दिया।
सरकार के इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए मिश्रा ने कहा कि एसोसिएशन ऐसी ‘‘चेतावनी’’ से नहीं डरती। मिश्रा ने कहा, ‘‘एसोसिएशन ने पिछले कुछ महीनों में कई बार स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात की है, लेकिन सरकार ने हमारी मांगों को नजरअंदाज कर दिया।’’
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘चूंकि सरकार ने हमारी जायज मांगों को नजरअंदाज़ किया, इसलिए हमें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। जब तक हमें अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, हम अपना विरोध जारी रखेंगे। अगर किसी मरीज़ को कुछ भी होता है, तो सरकार ज़िम्मेदार होगी।’’
इस बीच, विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने इस मामले को संभालने के तरीके को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार की आलोचना की और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से दखल देकर गतिरोध को खत्म करने की अपील की।
भाषा आशीष माधव
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