अजितदादा के रूप में सबसे अच्छा मुख्यमंत्री मिल सकता था पर वह हमारे बीच नहीं हैं: फडणवीस
अजितदादा के रूप में सबसे अच्छा मुख्यमंत्री मिल सकता था पर वह हमारे बीच नहीं हैं: फडणवीस
मुंबई, 23 फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि ‘‘राज्य को अजितदादा के रूप में सबसे अच्छा मुख्यमंत्री मिल सकता था’’, पर अब वह हमारे बीच नहीं हैं।
विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन अजित पवार को श्रद्धांजलि देते हुए फडणवीस ने कहा कि राज्य ने एक महान नेता एवं प्रशासक खो दिया है।
उन्होंने कहा कि अजित पवार की असामयिक मृत्यु से ऐसा राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है जो कभी नहीं भरा जा सकेगा।
पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा है।
फडणवीस ने कहा, “अजितदादा और मेरा जन्मदिन एक ही दिन है, लेकिन वह मुझसे उम्र में 11 साल बड़े थे। वह सच्चे मायने में मेरे दादा थे। राज्य को अजितदादा के रूप में सबसे अच्छा मुख्यमंत्री मिल सकता था, लेकिन अब वह हमारे बीच नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा कि अजित पवार रिकॉर्ड छह बार उपमुख्यमंत्री बने और उनमें राज्य का नेतृत्व करने की पूरी क्षमता थी।
बारामती हवाई पट्टी के पास 28 जनवरी को हुई विमान दुर्घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “अजितदादा हमेशा समय के पाबंद थे, लेकिन इस बार उनका समय चूक गया।”
मुख्यमंत्री ने उनकी पारदर्शी छवि और कर्मठता की प्रशंसा करते हुए कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में महायुति को नुकसान होने के बाद पवार ने ही पूरे राज्य का दौरा कर जनता से दोबारा संपर्क साधा।
उन्होंने कहा कि अजित पवार स्पष्टवादी थे और जो कहते थे वही करते थे।
फडणवीस ने महा विकास आघाडी के सत्ता में आने से पहले पवार के साथ गठबंधन में बनी दो दिन सरकार का जिक्र करते हुए याद किया, ‘‘अजितदादा अपने वचन के पक्के थे। 2019 में हमने साथ सरकार बनाने का फैसला किया था, लेकिन उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के पीछे हटने से ऐसा नहीं हो सका। अदालत का फैसला हमारे खिलाफ जाने के बाद उन्होंने मुझसे चर्चा की और फिर अपनी मूल पार्टी में लौट गए।”
फडणवीस ने यह भी कहा कि अजित पवार किसी भी मुख्यमंत्री के लिए सबसे अच्छे वित्त मंत्री थे। उन्होंने कहा, ‘‘अगर अजित पवार हमारे बीच होते तो वह इस साल अपना 12वां बजट पेश करते और अगले साल 13 बजट पेश करने का शेषराव वानखेड़े का रिकॉर्ड भी तोड़ देते।’’
मुख्यमंत्री ने बताया कि पवार ने वित्त विभाग की आपत्तियों के बावजूद “लाडकी बहिन योजना” लागू करवाई।
उन्होंने कहा कि वह राकांपा को हमेशा रणनीतिक साझेदार मानते थे, लेकिन अजित पवार उनके करीबी मित्र थे।
मुख्यमंत्री ने कहा, “उन्होंने (अजित पवार) चुनौतियों का डटकर सामना किया और अगर लगा कि वह गलत हैं तो सार्वजनिक रूप से माफी मांगने से भी नहीं हिचकते थे।”
मुख्यमंत्री ने यह भी याद किया कि पवार को हल्दी वाला दूध पसंद था और वह हमेशा बैठकों में ‘नोट्स’ के साथ पूरी तैयारी से आते थे। फडणवीस ने कहा कि 27 जनवरी को उन्होंने कैबिनेट और अवसंरचना समिति की बैठकों में भाग लेकर पूंजीगत व्यय में सकल मूल्यवर्धन न होने के मुद्दे पर चर्चा की थी।
उन्होंने कहा, “किसी ने नहीं सोचा था कि वह हमारी आखिरी मुलाकात होगी।”
मुख्यमंत्री ने पूर्व मंत्रियों- सुरूपसिंग नाइक, शालिनीताई पाटिल, राज पुरोहित, गंगाधर पटने तथा पूर्व विधायक नीलकंठ, विश्वास नांदेकर और रूपलेखा ढोरे को भी श्रद्धांजलि दी, जिनका हाल में निधन हो गया।
भाषा खारी नेत्रपाल
नेत्रपाल

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