किराये पर कार योजना से 1,375 निवेशकों को ठगा गया; पुलिस ने 246 वाहन बरामद किए : अधिकारी

किराये पर कार योजना से 1,375 निवेशकों को ठगा गया; पुलिस ने 246 वाहन बरामद किए : अधिकारी

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  • Publish Date - May 2, 2025 / 05:37 PM IST,
    Updated On - May 2, 2025 / 05:37 PM IST

ठाणे, दो मई (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले में पुलिस ने, कम से कम 1,375 निवेशकों को 20 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले ‘किराये पर कार’ रैकेट का भंडाफोड़ कर इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

आयुक्त मधुकर पांडे ने संवाददाताओं को बताया कि मीरा-भयंदर वसई-विरार (एमबीवीवी) पुलिस ने कई राज्यों के निवेशकों के 246 वाहन भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल धोखेबाजों द्वारा किया जा रहा था ।

उन्होंने कहा कि एमबीवीवी पुलिस द्वारा 20 अप्रैल को मामला दर्ज करने और जांच शुरू करने के बाद घोटाले का खुलासा हुआ।

पांडे ने कहा कि मुख्य आरोपी संदीप सुरेश कंदलकर उर्फ ​​राजू राजीव जोशी ने निवेशकों को पिकअप टेम्पो और चार पहिया वाहन खरीदने के लिए राजी किया और वादा किया कि अगर वे उन्हें किराये के लिए वाहन इस्तेमाल करने देंगे तो वे उन्हें हर महीने 55,000 से 75,000 रुपये का किराया देंगे।

उन्होंने बताया कि आरोपियों ने निवेशकों से कहा कि उनके नाम पर खरीदे गए वाहनों को हवाई अड्डों और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट में व्यावसायिक उपयोग के लिए लगाया जाएगा।

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी ने बताया, ‘‘समझौते 100 रुपये के स्टांप पेपर पर किए गए थे, और भुगतान ऑनलाइन लिया गया था। शुरुआत में कंदलकर ने वादे के मुताबिक भुगतान किए, लेकिन बाद में भुगतान नहीं किया, जिससे इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ।’’

अधिकारी ने बताया कि रत्नागिरी जिले के दापोली के निकट पिसाई गांव के मूल निवासी कंदलकर को 25 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था, उसके एक दिन बाद ही उसके साथी सचिन सुनील टेटगुरे को भी हिरासत में लिया गया था।

उन्होंने बताया कि इस रैकेट में कम से कम सात और लोग शामिल हैं।

पांडे ने बताया कि अब तक करीब 25 करोड़ रुपये मूल्य के 246 वाहन बरामद किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि कंदलकर और उसके साथियों ने इस योजना के जरिए 1,375 निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर उनसे करीब 20 करोड़ रुपये ठगे हैं।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चूंकि वाहनों को हवाईअड्डा और जेएनपीटी जैसे खास स्थानों पर तैनात किया गया था, इसलिए पुलिस के लिए कम समय में इतनी सारी गाड़ियां बरामद करना आसान था।

भाषा रंजन मनीषा

मनीषा