आठवले ने कैबिनेट में फेरबदल के संकेत दिये, शरद पवार गुट के सांसदों को राजग में आने का न्योता

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आठवले ने कैबिनेट में फेरबदल के संकेत दिये, शरद पवार गुट के सांसदों को राजग में आने का न्योता

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 08:21 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 08:21 PM IST

नागपुर, 17 अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री और आरपीआई(ए) प्रमुख रामदास आठवले ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल “बहुत जल्द” हो सकता है। साथ ही उन्होंने राकांपा (शप) के आठ सांसदों से अपील की कि यदि उनकी पार्टी के प्रमुख शरद पवार सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल नहीं होते हैं, तो वे राजग सरकार का हिस्सा बन सकते हैं।

राकांपा (शप) के सांसदों की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के प्रमुख रामदास आठवले ने विपक्षी दल से वैचारिक मतभेदों को दूर कर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे विकास कार्यों को और मजबूती मिलेगी।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री आठवले ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन में बदलाव के बाद “बहुत जल्द” केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है, जिसमें भाजपा और सहयोगी पार्टी राकांपा से नए लोगों को शामिल किए जाने की संभावना है।

आठवले ने शरद पवार गुट को केंद्र सरकार का हिस्सा बनने का स्पष्ट प्रस्ताव दिया।

आठवले ने कहा, “वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें (राकांपा-शप) राजग में शामिल हो जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अगर वरिष्ठ नेता शरद पवार ऐसा करने से इनकार करते हैं, तो विपक्षी पार्टी के आठ लोकसभा सदस्यों को सत्ताधारी गठबंधन में शामिल होने पर स्वतंत्र रूप से विचार करना चाहिए।

हालांकि, आठवले पर पलटवार करते हुए राकांपा (शप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने केंद्रीय मंत्री को ‘शेखचिल्ली’ बताया, जो हमेशा खयाली पुलाव पकाते रहते हैं।

क्रास्टो ने आरोप लगाया कि आठवले सत्ता के अलावा किसी भी विचारधारा में विश्वास नहीं रखते।

आठवले ने यह भी कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का सपना पूरा करने और समाज व पार्टी को मजबूत करने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संयोजक अभिजीत दीपके को आरपीआई (ए) में शामिल हो जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने आरक्षण खत्म करने की कुछ लोगों की मांग पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है और सरकार को इसे हटाने की मांग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप