कार्रवाई से पहले ऑटोरिक्शा, टैक्सी चालकों को मराठी सीखने का अवसर मिलेगा: प्रताप सरनाईक
कार्रवाई से पहले ऑटोरिक्शा, टैक्सी चालकों को मराठी सीखने का अवसर मिलेगा: प्रताप सरनाईक
मुंबई, 18 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र सरकार संशोधित मोटर वाहन नियमों के तहत भाषा की अनिवार्यता का पालन न करने वाले ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उन्हें मराठी सीखने का अवसर प्रदान करेगी। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरनाईक ने स्पष्ट किया कि मराठी न जानने वाले चालकों के परमिट या लाइसेंस तुरंत रद्द नहीं किए जाएंगे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी की रोजी-रोटी छीनना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राज्य में यात्री परिवहन सेवाएं देने वाले चालकों को स्थानीय भाषा का व्यावहारिक ज्ञान हो।
सरनाईक ने बताया कि महाराष्ट्र और विशेष रूप से मुंबई महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर) के लगभग छह लाख ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों को इस मराठी-शिक्षण पहल के तहत लाया जाएगा। राज्य में करीब 9.16 लाख ऑटोरिक्शा और 61,657 टैक्सियां पंजीकृत हैं। इन वाहनों में से बड़ी संख्या में एमएमआर में संचालित किए जाते हैं। सरनाईक ने कहा कि हमने इस पहल को जारी रखने और मराठी नहीं जानने वालों को यह भाषा सिखाने के प्रयास करने का निर्णय लिया है।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा कुछ माह पहले शुरू की गई मराठी सीखने की पहल के तहत देशभर से 1.65 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।
सरनाईक ने कहा, ”हम किसी को परमिट, लाइसेंस या बैज देने से इनकार नहीं करेंगे। पहले उन्हें नोटिस दिया जाएगा और मराठी सीखने का अवसर दिया जाएगा। निर्धारित अवधि के भीतर यदि वे मराठी नहीं सीखते हैं, तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”
परिवहन मंत्री के अनुसार, प्रक्रिया के तहत चालकों को पहले 30 दिन का नोटिस दिया जाएगा और भाषा सीखने का अवसर मिलेगा। यदि कोई चालक निर्धारित अवधि के भीतर मराठी सीखने में विफल रहता है, तो नियमों के तहत उसका परमिट या लाइसेंस निलंबित अथवा रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य चालकों को उनकी आजीविका से वंचित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि महाराष्ट्र में यात्री परिवहन सेवाएं देने वाले चालकों को मराठी का व्यावहारिक ज्ञान हो।
उन्होंने कहा, “मराठी भाषा और संस्कृति का विषय है। यह महाराष्ट्र की पहचान से भी जुड़ी हुई है। जो लोग महाराष्ट्र में रहते हैं और कारोबार करते हैं, उन्हें मराठी बोलने का प्रयास करना चाहिए।”
महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों का उल्लेख करते हुए सरनाईक ने कहा कि वहां भाषाई आदान-प्रदान आम बात है और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग अक्सर पड़ोसी राज्यों की भाषाएं भी बोलते हैं।
भाषा सुमित पवनेश
पवनेश

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