मुंबई, 15 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने बृहस्पतिवार शाम कहा कि वह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में मतदान के दौरान मार्कर कलम में इस्तेमाल की गई ‘पक्की’ स्याही की गुणवत्ता की गहन जांच करेगा।
विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मतदाता की उंगली पर लगा निशान आसानी से मिटाया जा सकता है, जिससे फर्जी मतदान की संभावना है।
बीएमसी सहित 29 नगर निकायों के लिए मतदान के बीच, सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो की बाढ़ आ गई, जिनमें यह दावा किया गया था कि एसीटोन जैसे रसायनों का उपयोग कर स्याही को कैसे मिटाया जा सकता है, वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों को खारिज कर दिया।
‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए, राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा कि विवाद को देखते हुए, एसईसी आगामी जिला परिषद चुनावों में मार्कर कलम का उपयोग नहीं करेगा, बल्कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक स्याही का उपयोग करेगा – जिसका उत्पादन कर्नाटक सरकार की कंपनी मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड द्वारा किया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘एसईसी ने जांच करने का फैसला किया है… इसमें न केवल स्याही की गुणवत्ता बल्कि दिन भर प्रसार किये गए वीडियो की भी जांच की जाएगी। वीडियो की जांच यह पता लगाने के लिए की जा रही है कि क्या मतदान के दौरान उंगली पर यह स्याही लगाई गई थी या किसी शरारतपूर्ण तरीके से ऐसा किया।’’
वाघमारे ने कहा, ‘‘हम राज्य भर में आज इस्तेमाल किए गए मार्कर कलम का नमूना लेंगे और हमें आपूर्ति की गई स्याही की गुणवत्ता की पुष्टि करेंगे। स्याही की गुणवत्ता का फार्मूला निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम रूप दिया गया है और एक निजी कंपनी ने एसईसी को कलम की आपूर्ति की है।’’
उन्होंने कहा, ‘हम 2011 से सभी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए इन कलम का उपयोग कर रहे हैं।’
एक अन्य एसईसी अधिकारी ने बताया कि कोरेस (इंडिया) लिमिटेड ने मार्कर पेन की आपूर्ति की थी और वे आयोग के निर्देशों के अनुरूप थे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए तीन मार्कर पेन उपलब्ध कराए गए थे।
इससे पहले, मतदाताओं की उंगलियों पर लगाई गई स्याही के आसानी से मिट जाने के आरोपों के बाद, आयोग के अधिकारियों ने एक प्रेस वार्ता की।
वाघमारे ने इसमें कहा, ‘स्याही लगाने के बाद सूखने में लगभग 10 से 12 सेकंड लगते हैं। इस दौरान मतदाता मतदान केंद्र के अंदर ही रहता है। एक बार सूख जाने पर इसे हटाया नहीं जा सकता। यह वही स्याही है जिसका उपयोग निर्वाचन आयोग करता है। यदि दो बार वोट डाला गया है, तो मतदान केंद्र के पीठासीन अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’’
एसईसी के एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘स्याही की तुलना में मार्कर पेन का उपयोग करना आसान और अधिक कारगर है। यही एकमात्र कारण था जिसके चलते एसईसी ने स्याही के बजाय मार्कर पेन का उपयोग करना शुरू किया था। लेकिन इस विवाद के बाद, हमने मार्कर पेन के बजाय स्याही का उपयोग करने का निर्णय लिया है।’
वाघमारे ने दावा किया कि एक झूठा विमर्श फैलाया जा रहा और मतदाताओं को स्याही सूखने से पहले उसे मिटाना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर स्याही सूखने से पहले मिटाई जाती है, तो यह मतदाता की गलती है। ऐसे मतदाताओं के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है।’
इससे पहले, कांग्रेस की मुंबई इकाई की नेता एवं लोकसभा सदस्य वर्षा गायकवाड ने अपने पार्टी सहयोगी का एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वह अपनी उंगली में लगी स्याही मिटाने के लिए एसीटोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘क्या बीएमसी जवाबदेही से पल्ला झाड़ रही है? सुबह से हमें कई शिकायतें मिल रही हैं कि मताधिकार का निशान दिखाने के लिए इस्तेमाल की जा रही स्याही आसानी से मिटाई जा सकती है। मेरे सहयोगी और उनकी पत्नी यहां दिखा रहे हैं कि इस स्याही को एसीटोन या ‘नेल पॉलिश रिमूवर’ से कितनी आसानी से मिटाया जा सकता है।’’
गायकवाड ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘इस बार बीएमसी चुनाव के प्रबंधन ने जवाबदेही और पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मतदाताओं को आखिरी समय में दी गई रिश्वतों को अनदेखा किया गया, मतदाताओं के नाम गायब हैं, लोगों को राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में अपना नाम ढूंढने में मुश्किल हो रही है और स्याही को आसानी से मिटाया जा रहा है। हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास हर कीमत पर सुरक्षित रखा जाना चाहिए, लेकिन आयोग और बीएमसी को इसकी कोई परवाह नहीं। शर्मनाक!’’
एक टीवी चैनल के पत्रकार ने पनवेल से लौटने के तुरंत बाद अपने स्टूडियो में एसीटोन का उपयोग करके स्याही मिटाने का एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने पनवेल में अपना वोट डाला था।
स्याही आसानी से मिटने के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, बीएमसी ने एक बयान में कहा कि ऐसी खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
बयान में कहा गया कि प्रक्रिया के अनुसार, मतदान केंद्र पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर वोट डालते समय मतदान कर्मचारी मतदाता के बाएं हाथ की एक उंगली पर पक्की स्याही लगाते हैं।
भाषा सुभाष पवनेश
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