मुंबई, 12 जुलाई (भाषा) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख योजना ‘लाडकी बहिन’ के क्रियान्वयन में 3,541.16 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च, जमा खातों में हजारों करोड़ रुपये रखने और वित्तीय प्रबंधन में कमियों को उजागर किया है।
शुक्रवार को राज्य विधानमंडल में पेश की गई कैग राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट 2024-25 में कहा गया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस अतिरिक्त खर्च के लिए कोई विशिष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग ने योजना के लिए स्वीकृत 29,693.09 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 33,237.24 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसके कारण 3,541.16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ।
इसमें बताया गया कि योजना के लिए कुल 29,693.09 करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया था, जिसमें अनुपूरक प्रावधानों के माध्यम से 26,200 करोड़ रुपये और ‘लेक लाड़की योजना’ से पुनर्वियोजित 3,490.75 करोड़ रुपये शामिल थे।
कैग ने कहा कि ऑडिट जांच से पता चला है कि जनवरी और मार्च 2025 के बीच निकाली गई 15,586 करोड़ रुपये की राशि को आभासी वैयक्तिक जमा लेखा (वीपीडीए) में अंतरित कर दिया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया, ’’बड़ी मात्रा में धनराशि की निकासी से यह संकेत मिलता है कि इन निधियों की तत्काल आवश्यकता नहीं थी और वास्तविक खर्च की जरूरत के बिना ही इन्हें सरकारी खजाने से निकाल लिया गया।’’
इस व्यवस्था को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए कैग ने कहा कि तत्काल आवश्यकता न होने के बावजूद धनराशि निकालकर वीपीडीए में रख देना ‘‘बजटीय अनुशासन और वित्तीय शुचिता के सिद्धांतों के विपरीत’’ है।
भाषा खारी वैभव
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