मुंबई, 11 जून (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मामलों की सुनवाई करने वाली यहां की एक विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ कथित धोखाधड़ी का मामला मजिस्ट्रेट अदालत में स्थानांतरित कर दिया।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा था कि पंजाब नेशनल बैंक (सीबीआई) के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित नहीं किए जा सके।
बैंक के मुंबई जो कार्यालय की शिकायत के बाद, केंद्रीय एजेंसी ने नीरव मोदी, उससे जुड़ी कंपनियों के निदेशकों और पीएनबी के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
शिकायत के अनुसार, नीरव मोदी की कंपनियों को दी गई ऋणा सुविधाओं का गलत इस्तेमाल करके बैंक के साथ 321.88 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
शिकायत में कहा गया है कि एक अंदरूनी जांच के दौरान बैंक को नीरव मोदी की साझेदारी वाली कंपनियों सोलर एक्सपोर्ट्स, स्टेलर डायमंड्स और डायमंड आर यूएस और उसकी कंपनियों – फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड और फायरस्टार डायमंड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के बीच चक्रीय लेनदेन का खुलासा हुआ।
आरोपियों पर शुरू में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सीबीआई ने हालांकि बृहस्पतिवार को अदालत को बताया कि गहन जांच में पीएनबी अधिकारियों या निजी व्यक्तियों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ के तहत दोषी ठहराने लायक सबूत नहीं मिला।
सीबीआई की ओर से पेश हुए सरकारी वकील विक्रम सिंह ने कहा कि आरोप पत्र के केवल निजी लोगों के ख़िलाफ़ ही दायर की जाएगी, इसलिए यह मामला विशेष सीबीआई अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आएगा और इसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट द्वारा की जानी चाहिए।
विशेष न्यायाधीश जे पी दारेकर ने मामले को स्थनांतरित करने की एजेंसी की अर्जी स्वीकार कर ली।
भाषा धीरज रंजन
रंजन