मुंबई, 25 मई (भाषा) कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने सोमवार को नरेन्द्र मोदी नीत सरकार पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी करके आम लोगों को “लूटने” का आरोप लगाया और मूल्य वृद्धि तत्काल वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 11 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम में प्रति लीटर आठ रुपये की वृद्धि हुई है। उन्होंने दावा किया कि ईरान संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुई इस बढ़ोतरी ने पहले से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
सपकाल ने कहा, “अगर सरकार महंगाई पर नियंत्रण नहीं कर सकती, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस्तीफा दे देना चाहिए।”
उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस मंगलवार से महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले में अपने विभिन्न विभागों, प्रकोष्ठों और संबद्ध संगठनों के माध्यम से विरोध प्रदर्शन करेगी और ईंधन मूल्य वृद्धि वापस लेने तथा नागरिकों की “लूट” बंद करने की मांग उठाएगी।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार ईंधन कीमतों में वृद्धि के लिए ईरान संघर्ष का हवाला देकर लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों में पेट्रोल की कीमतों में 38 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 62 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सरकारी तेल कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के कारण सोमवार को देश में पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में चौथी वृद्धि है।
सपकाल ने पूर्ववर्ती सरकार से तुलना करते हुए दावा किया कि कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने पर भी ईंधन के दाम 72 रुपये प्रति लीटर से नीचे रखे गए थे।
उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, मोदी सरकार के अधिकांश कार्यकाल में कच्चे तेल की कीमत लगभग 50-55 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहने के बावजूद पेट्रोल करीब 100 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा है।
सपकाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में पेट्रोलियम उत्पादों पर कर और उत्पाद शुल्क के जरिए 43 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि एकत्र की है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों — इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम — ने ताजा मूल्य वृद्धि के कुछ ही घंटों में 12,400 करोड़ रुपये कमा लिये।
भाजपा नेताओं की आलोचना करते हुए सपकाल ने कहा कि संप्रग शासन के दौरान ईंधन कीमतों में मामूली बढ़ोतरी पर भी भाजपा नेता विरोध प्रदर्शन करते थे, लेकिन अब महंगाई पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने पेट्रोल पंपों पर लगी कतारों को लेकर भाजपा नेताओं के उन बयानों की भी आलोचना की, जिनमें पर्याप्त ईंधन भंडार उपलब्ध होने के आश्वासन के बावजूद भीड़ को घबराहट में की जा रही खरीदारी का परिणाम बताया गया था।
सपकाल ने ऐसे बयानों को “गैर-जिम्मेदाराना” और “भ्रामक” बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है।
भाषा अमित माधव
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