जालना, दो जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के जालना शहर में 15 जनवरी को होने वाले निकाय चुनाव से पहले, महायुति गठबंधन में सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) मुस्लिम मतदाताओं को अपने हक में करने के लिए इस समुदाय से उम्मीदवार उतार रहे हैं।
अपनी पिछली परंपरा से हटकर, भाजपा ने शहर में चार मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। राजनीतिक विश्लेषक इस बदलाव का कारण हाल में भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस के पूर्व विधायक कैलाश गोरंट्याल के प्रभाव को मानते हैं और इस कदम से मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि, शुरुआत में महायुति गठबंधन के सभी दलों के एक साथ चुनाव लड़ने की उम्मीद थी, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेदों के कारण अंतिम समय में गठबंधन टूट गया। जालना शहर महानगरपालिका में 65 निर्वाचन क्षेत्र हैं।
जालना में मुस्लिम मतदाता लगभग 20 से 25 प्रतिशत हैं और वार्ड दो, चार, 10 और 11 में उनका निर्णायक प्रभाव है।
महायुति के अन्य सहयोगी दलों में, एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने सात मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा ने मुस्लिम समुदाय से 17 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है।
दूसरी ओर, कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) वाला विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी (एमवीए) मिलकर चुनाव लड़ रहा है। कांग्रेस ने 51 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, जिनमें 19 मुस्लिम उम्मीदवार हैं। शिवसेना (उबाठा) ने 13 सीट पर चुनाव लड़ने के बावजूद मुस्लिम समुदाय के किसी भी नेता को टिकट नहीं दिया है। राकांपा (शप) ने दो मुस्लिम उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है।
इस बीच, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने जालना के मुस्लिम बहुल इलाकों की 17 सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इसकी जिला इकाई के अध्यक्ष शेख मजीद ने कहा कि लोग एक विकल्प की तलाश में हैं और एआईएमआईएम उनकी आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है।
राज्य में जालना शहर महानगरपालिका सहित 29 निकायों के चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन होगी।
भाषा खारी मनीषा
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