युवाओं की हताशा का परिणाम है कॉकरोच जनता पार्टी, इसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखना चाहिए: तेदेपा

युवाओं की हताशा का परिणाम है कॉकरोच जनता पार्टी, इसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखना चाहिए: तेदेपा

युवाओं की हताशा का परिणाम है कॉकरोच जनता पार्टी, इसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखना चाहिए: तेदेपा
Modified Date: May 25, 2026 / 11:16 am IST
Published Date: May 25, 2026 11:16 am IST

अमरावती, 25 मई (भाषा) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) ने सोमवार को कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) देश के युवाओं की हताशा का परिणाम है और इसे युवाओं की चिंताओं के नजरिये से देखा जाना चाहिए।

सरकार द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया खातों पर प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ दिनों बाद तेदेपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पल्ला श्रीनिवास राव ने कहा कि सीजेपी के मुद्दे को राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।

राव ने एक बयान में कहा, ‘‘सीजेपी के मुद्दे को केवल राजनीतिक नजरिये से नहीं बल्कि युवाओं की भावनाओं के नजरिये से भी देखा जाना चाहिए ताकि उन्हें समझा जा सके।”

तेदेपा नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक सरकारों को देश के युवाओं द्वारा उनकी आकांक्षाओं, रोजगार अवसरों, प्रतियोगी परीक्षाओं और आर्थिक दबावों को लेकर व्यक्त की जा रही भावनाओं को जिम्मेदारी के साथ स्वीकार करना चाहिए।

राव ने कहा कि सोशल मीडिया पर इन रुझानों को देखते हुए सरकार को युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जरूरी नीतिगत बदलाव और संशोधन करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य इस तरीके से शासन करना है कि युवाओं को यह न लगे कि उनके साथ धोखा हुआ है बल्कि उन्हें यह महसूस हो कि उनकी आकांक्षाएं पूरी हुई हैं।

तेदेपा नेता के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू युवाओं के भविष्य और आर्थिक विकास सहित इन पहलुओं पर हमेशा ध्यान केंद्रित करते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि राजग सरकार रोजगार सृजन, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप, विनिर्माण क्षेत्र, औद्योगिक विकास और अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने को लेकर दीर्घकालिक योजनाओं के साथ आगे बढ़ रही है।

राव ने कहा कि सोशल मीडिया एक ऐसा मंच बनता जा रहा है जिस पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल सीमा पार या विदेशों से प्रभाव डालने के लिए भी किया जा सकता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता लेकिन हर आलोचना को राष्ट्र-विरोधी कदम नहीं माना जाना चाहिए।

श्रीनिवास ने दावा किया कि कुछ राजनीतिक दल युवाओं की चिंताओं का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समस्याओं को राजनीतिक अभियान का माध्यम बनाना ठीक नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में आलोचना सुनना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्व नेतृत्व की निशानी है।

उन्होंने रेखांकित किया कि भारतीय युवा देश के खिलाफ नहीं हैं बल्कि वे अवसर, पारदर्शिता और त्वरित शासन चाहते हैं।

पिछले सप्ताह अस्तित्व में आई और सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर के साथ सुर्खियों में रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के ‘एक्स’ अकाउंट पर भारत में 21 मई को रोक लगा दी गई। हालांकि, इस रोक के कुछ ही देर बाद ‘कॉकरोच मरता नहीं है’ टैगलाइन के साथ ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से एक और हैंडल बना दिया गया।

सीजेपी प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की उस टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आई जिसमें उन्होंने वकीलों को ‘‘वरिष्ठ’’ दर्जा देने से जुड़ी सुनवाई के दौरान ‘‘परजीवी’’ और ‘‘कॉकरोच’’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।

मुख्य न्यायाधीश ने बाद में स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणियां ‘‘फर्जी और जाली डिग्रियों’’ के जरिये विधि पेशे में आने वाले लोगों को लेकर थीं और उन्हें गलत ढंग से उद्धृत किया गया।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


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