दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ बिहार विधानमंडल परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन

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दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ बिहार विधानमंडल परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 03:19 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 03:19 PM IST

पटना, 21 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में यहां बिहार विधानमंडल परिसर में विपक्षी दलों के सदस्यों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया।

विपक्षी सदस्यों ने बिहार विधानसभा एवं विधान परिषद के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया तथा अपनी बांहों पर काली पट्टियां बांधी।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायक चंद्रशेखर यादव ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘छात्र नयी दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च में हिस्सा ले रहे थे, इसके बावजूद उनपर जिस बर्बरता से लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, वह लोकतंत्र पर एक कलंक है।’’

यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र और संविधान विरोधी इस सरकार को जाना होगा। काले कारनामों, भ्रष्टाचार और देश को अपने कुछ उद्योगपति मित्रों के हाथों बेचने वाली इस सरकार को देश पर शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।’’

राजद विधायक ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अपने कथित तानाशाहीपूर्ण तरीकों में ब्रिटिश शासन को भी पीछे छोड़ दिया है।

भाकपा (माले) की विधान पार्षद शशि यादव ने भी केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को देश को बताना चाहिए कि छात्रों पर बर्बरतापूर्ण तरीके से लाठीचार्ज क्यों कराया गया।’’

राजद विधान पार्षद कारी सोहैब ने आरोप लगाया कि नयी दिल्ली में प्रदर्शन स्थल पर सादे कपड़ों में मौजूद कई लोगों ने छात्रों पर लाठियां बरसाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सादे कपड़े में लाठी बरसाने वाले ये लोग पुलिसकर्मी कतई नहीं थे।

सोहैब ने सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का हवाला देते हुए कहा, ‘‘पुलिस ने कई लोगों के पैर, हाथ, सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटें पहुंचाईं। इतना ही नहीं, पुलिसकर्मियों के अलावा भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों की पिटाई की।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतंत्र को कमजोर कर ‘‘तानाशाही और गुंडागर्दी’’ के जरिये शासन करना चाहती है।

भाषा कैलाश सुरेश

सुरेश