मुंबई, 16 जुलाई (भाषा) नागपुर के एक उपभोक्ता आयोग ने वादे के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध नहीं कराने को सेवा में कमी मानते हुए आईआईटी कोचिंग सेंटर को छात्र के पिता को 1.35 लाख रुपये की फीस लौटाने और अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस महीने की शुरुआत में दिए गए अपने आदेश में कहा कि विपक्षी पक्ष (आईआईटी प्वाइंट कोचिंग क्लासेज के निदेशक) बिना किसी उचित कारण के तय समय पर कक्षाएं शुरू करने में विफल रहा।
आयोग ने कहा, ‘छात्रों को आकर्षित करने के लिए विवरणिका और विज्ञापनों के माध्यम से जिन सुविधाओं और मानकों का दावा किया गया था, उन्हें उपलब्ध नहीं कराना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है।’
छात्र के पिता की ओर से दाखिल शिकायत के अनुसार, उन्होंने अपने नाबालिग बेटे का संस्थान के 24 महीने के शैक्षणिक कार्यक्रम में दाखिला कराया था और 26 मार्च से छह जुलाई 2024 के बीच ऑनलाइन और नकद किस्तों के माध्यम से 1,35,000 रुपये की फीस जमा की थी।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, संस्थान ने नियमित कक्षाएं एक अप्रैल 2024 से शुरू करने का वादा किया था, लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के शुरुआत की तारीख बढ़ाकर जून 2024 कर दी गई, जिससे छात्र की पढ़ाई प्रभावित हुई और उसे मानसिक तनाव झेलना पड़ा।
शिकायत में कहा गया कि छात्र ने 26 मार्च 2024 को कोचिंग कार्यक्रम में दाखिला लिया था और नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल हो रहा था, लेकिन कोचिंग सेंटर वादा की गई शैक्षणिक सेवाएं उपलब्ध कराने में विफल रहा।
छात्र के पिता ने आरोप लगाया कि पढ़ाने के लिए जिस विशेषज्ञ संकाय का वादा किया गया था, वह उपलब्ध नहीं कराया गया और दाखिले के समय किए गए आश्वासनों के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता भी नहीं थी।
उन्होंने दावा किया कि कोचिंग सेंटर ने उनकी शिकायतों को बार-बार नजरअंदाज किया, जिससे उनके बेटे को शारीरिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसके बाद छात्र ने 28 अगस्त 2024 को कोचिंग कार्यक्रम छोड़ दिया और उसके पिता ने अक्टूबर 2024 में पूरी फीस वापस करने का अनुरोध किया।
कोचिंग संस्थान की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने 28 अक्टूबर 2024 को कानूनी नोटिस भेजा और बाद में उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराई।
औपचारिक नोटिस भेजे जाने के बावजूद दूसरा पक्ष पेश नहीं हुआ, जिसके कारण आयोग को एकतरफा (सिर्फ एक पक्ष की मौजूदगी में) सुनवाई करनी पड़ी।
रिकॉर्ड में उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आयोग ने माना कि कोचिंग सेंटर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी है।
आयोग ने कोचिंग सेंटर को शिकायतकर्ता को 1,35,000 रुपये की पूरी फीस लौटाने का निर्देश दिया। साथ ही, शिकायत दर्ज होने की तारीख दो दिसंबर 2024 से वास्तविक भुगतान तक इस राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने को कहा।
आयोग ने कहा, ‘संस्थान, शिकायतकर्ता को हुई मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और असुविधा के लिए 25,000 रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करे।’
भाषा
शुभम नरेश
नरेश