ठाणे, 15 अप्रैल (भाषा) ठाणे की एक अदालत ने 53 वर्षीय व्यक्ति को नाबालिग लड़की से बलात्कार के आरोपों से बरी कर दिया है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष के सबूत ‘‘ठोस और निर्णायक’’ नहीं थे, साथ ही उसने फोन पर घटना को रिकॉर्ड करने के पीड़िता के दावे पर भी सवाल उठाए।
विशेष न्यायाधीश प्रेमल एस विठलानी (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण मामले), ने नौ अप्रैल के अपने आदेश में पीड़िता के बयान में विरोधाभासों को भी उजागर किया।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि पेशे से दर्जी और ठाणे शहर में रहने वाले व्यक्ति ने 17 वर्षीय लड़की की मां से घर की चाबियां लेने के बाद दिसंबर 2022 और जनवरी 2023 के बीच, लड़की से कई बार दुष्कर्म किया था।
पीड़िता ने दावा किया कि उसने 14 जनवरी, 2023 को घटना का गोपनीय तरीके से वीडियो बना लिया था।
पीड़िता की मां इलाके में खाना बनाने का काम करती थी। चूंकि लड़की के पिता ने पहले कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया था, इसलिए उसकी मां उसे घर में बंद करके बाहर से ताला लगा देती थी और लौटने तक चाबियां आरोपी को सौंप देती थी।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने स्थिति का फायदा उठाया, पीड़िता के घर गया और उसे धमकी देकर कई बार उसके साथ बलात्कार किया।
आरोपी को जनवरी 2023 में गिरफ्तार कर लिया गया था। उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) (बार-बार बलात्कार), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और 506 (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘ यह बेहद असंभव है कि बलात्कार करने वाला अपराधी पीड़िता को मोबाइल फोन पर घटना का वीडियो बनाने की अनुमति दे।’’
अदालत ने कहा कि हालांकि फॉरेंसिक रिपोर्ट में एक पुरुष से जुड़े दो वीडियो का उल्लेख किया गया था, लेकिन अभियोजन पक्ष अदालत में उन वीडियो को साबित करने में विफल रहा।
न्यायाधीश ने पीड़िता के अदालत में दिए गए बयान और मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए उसके पहले के बयान के बीच विरोधाभासों पर भी प्रकाश डाला। पीड़िता ने अदालत को बताया कि पहली घटना उस व्यक्ति के घर पर सिलाई के काम के दौरान हुई थी, जबकि उसके पहले के बयान में उसने दावा किया था कि वह अपराध करने के इरादे से उसके घर में घुसा था।
न्यायाधीश ने कहा, ‘निश्चित रूप से, दोनों बयानों में बड़ी विसंगतियां अभियोजन पक्ष के मामले को प्रभावित करेंगी।’’
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ‘बुनियादी तथ्य’ स्थापित करने में विफल रहा और उसने आरोपी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
भाषा शोभना मनीषा
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