अदालत ने हेरोइन जब्ती मामले में दक्षिण अफ्रीकी महिला को बरी किया
अदालत ने हेरोइन जब्ती मामले में दक्षिण अफ्रीकी महिला को बरी किया
मुंबई, 19 फरवरी (भाषा) मुंबई में स्वापक ओषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के मामलों पर सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने 34 वर्षीय दक्षिण अफ्रीकी महिला को करीब तीन किलोग्राम हेरोइन जब्ती मामले में बरी कर दिया और गंभीर प्रक्रियागत लापरवाही व कर्तव्य में चूक को लेकर जांच अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है।
विशेष अदालत ने नौ फरवरी को दिए फैसले में कहा कि स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन न करने के कारण गंभीर मामले में महिला “सजा से बच गई”।
न्यायाधीश यू सी देशमुख ने कहा, “जब कठोर सजा का प्रावधान होता है, तो कानून का सख्ती से पालन अपेक्षित होता है।”
उन्होंने कहा, ‘‘अभियोजन के अनुसार आरोपी के कब्जे से 2.9 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई थी और इसकी मात्रा व प्रकृति अपराध की गंभीरता दर्शाती है।’’
अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी और टीम के अन्य सदस्यों को कानून की प्रक्रिया का पूरी सावधानी से पालन करना चाहिए था।
अदालत ने आदेश दिया कि फैसले की प्रति नयी दिल्ली स्थित एनसीबी महानिदेशक को भेजी जाए ताकि दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
अभियोजन के अनुसार फरवरी 2021 में एनसीबी को सूचना मिली थी कि कतर एयरवेज की उड़ान से मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचने वाली दक्षिण अफ्रीकी महिला मादक पदार्थ ला सकती है।
इसने बताया कि पेशे से हेयरड्रेसर प्रॉमिस खालिशवायो को रोका गया। उसकी तलाशी में कुछ नहीं मिला, लेकिन अधिकारियों का दावा था कि उसके ट्रॉली बैग की लाइनिंग में 2.960 किलोग्राम हेरोइन छिपाई गई थी।
अदालत ने आदेश में जांच टीम की कई गंभीर चूकों का उल्लेख किया। महिला की तलाशी एक ऐसे सहायक ने ली जिसे कानून के तहत ऐसा करने का अधिकार नहीं था।
जांच अधिकारी ने सीसीटीवी फुटेज एक महीने बाद मांगा, तब तक डेटा मिट चुका था। इसके अलावा, अभियोजन पक्ष मुकदमे के दौरान स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कर सका और दावा किया उनका पता नहीं चल पाया, जबकि वे हवाईअड्डे के सुरक्षा गार्ड थे।
अदालत ने यह भी कहा कि टीम में कोई महिला अधिकारी नहीं थी जबकि एजेंसी को आरोपी के आगमन की जानकारी 12–14 घंटे पहले से थी, जो “लापरवाही, उपेक्षा और कर्तव्य की अवहेलना” दर्शाता है।
अदालत ने दक्षिण अफ्रीकी नागरिक को बरी करते हुए फैसला सुनाया, “उपरोक्त बातों का निष्कर्ष यह है कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है।’’
भाषा खारी माधव
माधव

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