मुंबई, पांच जनवरी (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने सोमवार को पुलिस को उन आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया कि कांग्रेस ने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का वादा संगठन को बदनाम करने की दुर्भावनापूर्ण मंशा से किया था।
शहर में बजरंग दल के एक कार्यकर्ता द्वारा अधिवक्ता संतोष दुबे के माध्यम से दायर शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के साथ उसकी तुलना करके जानबूझकर संगठन की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है।
इसने पार्टी, उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और दक्षिणी राज्य के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 (मानहानि के लिए सजा) के तहत अपराधों के लिए कार्रवाई की मांग की।
प्रथम श्रेणी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (मझगांव अदालत) ए.ए. कुलकर्णी ने भांडुप पुलिस को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 202 के तहत जांच करने और 17 फरवरी तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 202 के तहत, मजिस्ट्रेट किसी आपराधिक शिकायत की जांच कर सकता है, या आरोपी को समन जारी करने से पहले पुलिस को ऐसा करने का निर्देश दे सकता है।
कांग्रेस ने 2023 के कर्नाटक चुनावों के लिए अपने चुनावी घोषणापत्र में कहा था कि वह बजरंग दल और पीएफआई जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने सहित कानून के अनुसार निर्णायक कार्रवाई करेगी। पार्टी ने आरोप लगाया कि ये संगठन समुदायों के बीच शत्रुता को बढ़ावा दे रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 3 के तहत, केवल केंद्र सरकार को ही किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार है, जिससे कांग्रेस का वादा “झूठा दावा” और “मानहानिकारक आरोप” बन जाता है।
भाषा प्रशांत दिलीप
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