मुंबई, 13 जुलाई (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य प्रफुल्ल पटेल ने सोमवार को कहा कि दिग्गज नेता अजित पवार के निधन से बने खालीपन को भरना मुश्किल है।
पटेल ने कहा कि महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में प्रासंगिक बने रहने के लिए पार्टी को ‘सुधारात्मक कदम’ उठाने होंगे।
पटेल का यह बयान ऐसे समय आया है जब 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के संगठनात्मक भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
पटेल ने स्वीकार किया कि पार्टी के सामने नेतृत्व के पुनर्गठन और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की चुनौती है।
उन्होंने कहा, ‘अजितदादा के जाने से बने खालीपन को भरना मुश्किल है। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि पार्टी को कुछ सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।’ हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार ने राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाल लिया है, जबकि पार्थ पवार ने संगठन में बड़ी भूमिका संभाली है। बताया जा रहा है कि इन घटनाक्रमों से कुछ वरिष्ठ नेताओं और नए नेतृत्व के बीच मतभेद पैदा हुए हैं।
हालांकि, पार्टी ने आधिकारिक रूप से इन दावों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
पार्टी द्वारा निर्वाचन आयोग को राष्ट्रीय पदाधिकारियों और कार्यसमिति सदस्यों की संशोधित सूची सौंपे जाने के बाद आंतरिक चर्चाओं ने जोर पकड़ा।
सूत्रों के अनुसार, प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के नाम या तो सूची में शामिल नहीं थे या उनके आधिकारिक पदों के बिना दर्शाए गए थे। बाद में पार्टी ने इसे टाइपिंग की गलती बताया।
हालांकि, उस पत्र और उसे तैयार किए जाने के तरीके को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे विवाद खड़ा हुआ।
पार्टी सूत्रों ने कहा कि कुछ वरिष्ठ नेता संगठनात्मक अधिकारों के केंद्रीकरण और चुनाव टिकटों के वितरण तथा पार्टी संसाधनों के आवंटन की भविष्य की प्रक्रिया को लेकर चिंतित हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अजित पवार के नेतृत्व के अभाव में राकांपा को सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में अपनी राजनीतिक जगह बनाए रखने की चुनौती होगी। महायुति गठबंधन में भाजपा, शिवसेना और राकांपा शामिल हैं।
एक वरिष्ठ मंत्री ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि मौजूदा नेतृत्व को यह साबित करना होगा कि पार्टी पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में अब भी महत्वपूर्ण जनसमर्थन रखती है, ताकि गठबंधन में उसकी स्थिति बनी रहे।
पार्टी नेताओं ने कहा कि तत्काल प्राथमिकता कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाना है कि अजित पवार का विकास का एजेंडा जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि पार्टी खुद को सामूहिक नेतृत्व मॉडल में सफलतापूर्वक बदल पाती है या नहीं।
भाषा अमित वैभव
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