मच्छर मारने के लिए तलवार न चलाएं, शक्तियों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करें: उच्च न्यायालय

मच्छर मारने के लिए तलवार न चलाएं, शक्तियों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करें: उच्च न्यायालय

मच्छर मारने के लिए तलवार न चलाएं, शक्तियों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करें: उच्च न्यायालय
Modified Date: August 11, 2026 / 05:51 pm IST
Published Date: August 11, 2026 5:51 pm IST

मुंबई, 11 अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र एफडीए (अन्न व औषध प्रशासन) मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल कर रहा है और उसे अपनी शक्तियों का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से करने का निर्देश दिया तथा यह चेतावनी भी दी कि उसकी कठोर कार्रवाई के मामले संज्ञान में आने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

कुछ खास दवाइयों पर एफडीए की कार्रवाई को चुनौती देने वाली कैडिला फार्मास्यूटिकल्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने एजेंसी को निर्देश दिया कि वह कोई भी सख्त कदम उठाने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दे।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायाधीश गौतम अंखाड की पीठ की टिप्पणियों के बाद, एफडीए ने कहा कि नियामक याचिकाकर्ता के खिलाफ अपने आदेश वापस ले लेगा, कारण बताओ नोटिस जारी करेगा और सख्त आदेश पारित करने से पहले उसे सुनवाई का मौका देगा।

कैडिला फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड ने एफडीए के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ब्रांडिंग में समानता के कारण राज्य भर में उसकी कुछ दवाइयों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने और 2.45 करोड़ रुपये का भंडार जब्त करने का आदेश दिया गया था।

सरकारी वकील नेहा भिडे ने अदालत को बताया कि इन दवाइयों के बीच भ्रम की स्थिति थी, इसलिए यह फैसला लिया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एहतियाती कदम था, न कि कोई मनमाना या कठोर कदम।’

एसीलोक 150, एसीलोक 150 प्लस, एसीलोक 300 और एसीलोक 300 प्लस दवाइयों पर एफडीए के आदेश का जिक्र करते हुए, कंपनी ने दावा किया कि रोक लगाने संबंधी आदेश जारी करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।

पीठ ने कहा कि कोई भी कड़ा कदम उठाने से पहले एफडीए को कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका देना चाहिए था।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘हमें इस बात की चिंता नहीं है कि आदेश जारी होने के बाद पिछले दो हफ्तों में कंपनी को कितना नुकसान हुआ है। हमें उन लोगों की चिंता है जिन्हें ये दवाइयां नहीं मिल पाई हैं।’’

एफडीए पर भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी देते हुए अदालत ने कहा कि नियामक द्वारा बहुत कठोर कदम उठाने के ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘आपके (एफडीए) पास तलवार चलाने की ताकत तो है, लेकिन समस्या यह है कि आप उसका इस्तेमाल मच्छर मारने के लिए कर रहे हैं। इस ताकत का इस्तेमाल समझदारी से किया जाना चाहिए। इसका सही तरीके से इस्तेमाल होना चाहिए। होटलों और रेस्तरां के मामलों में भी, आप पहले कार्रवाई करते हैं और फिर सवाल पूछते हैं।’’

जब भिडे ने अदालत को बताया कि एफडीए याचिकाकर्ता कंपनी के खिलाफ अपने आदेश वापस ले लेगा और कोई सख्त आदेश जारी करने से पहले उसे सुनवाई का मौका देगा, तो उच्च न्यायालय ने यह बयान स्वीकार कर लिया और याचिका का निस्तारण कर दिया।

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान, अदालत ने एफडीए के लिए ‘‘मच्छर और तलवार’’ मुहावरे का इस्तेमाल किया तथा एमेजॉन रिटेल इंडिया के एक गोदाम के खिलाफ बहुत सख्त कार्रवाई करने के लिए एजेंसी को फटकार लगाई।

पीठ ने नियमों के उल्लंघन के खिलाफ एफडीए की कार्रवाई की तारीफ तो की, लेकिन यह भी पूछा कि क्या सभी वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को बंद करना ही इस स्थिति से निपटने का सही तरीका है।

अदालत ने एजेंसी को व्यवस्थित ढंग से काम करने की सलाह दी। मई में आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे के एफडीए प्रमुख बनने के बाद से ही एजेंसी कुछ मशहूर भोजनालयों समेत खाने-पीने की कई जगहों पर लगातार छापेमारी को लेकर खबरों में रही है।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


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