मुंबई, सात मार्च (भाषा) फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने शनिवार को कहा कि जारी ईरान युद्ध के आर्थिक परिणाम रूस-यूक्रेन युद्ध से भी अधिक घातक हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति ‘असहज’ कर देने वाली गति से बिगड़ रही है।
‘फिनलैंड-भारत व्यापार शिखर सम्मेलन’ में स्टब ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान में रणनीतिक आकलन वेनेजुएला की तुलना में ‘अत्यंत जटिल’ सिद्ध हुआ है और अयातुल्ला खामेनेई की हत्या का गहरा प्रभाव होगा।
उन्होंने जोर दिया कि हालांकि रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करना उनकी प्राथमिकता है, किंतु ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता संघर्ष बहुत ‘असहज’ करने वाला है।
स्टब ने कहा, ‘हमने अभी तक इस युद्ध के आर्थिक निहितार्थों को समझना भी शुरू नहीं किया है। यह रूस-यूक्रेन युद्ध के आर्थिक प्रभावों से बहुत बड़ा हो सकता है, इसलिए अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।’
यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान युद्ध के कारण रूस-यूक्रेन संघर्ष में शांति स्थापित करने के ट्रंप के प्रयासों से उनका ध्यान भटकेगा तो स्टब ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप वेनेजुएला में अपनी सफलता के बाद स्वयं को अत्यधिक शक्तिशाली अनुभव कर रहे थे। उन्हें लगा कि वे ईरान में भी वैसी ही रणनीतिक जीत हासिल कर लेंगे, परंतु यह स्थिति अनुमान से कहीं अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण निकली है। अयातुल्ला खामेनेई की हत्या जैसे कड़े कदमों ने इस संकट को और अधिक गहरा दिया है, जिससे यूक्रेन में शांति बहाली के प्रयासों के प्राथमिकता खोने की आशंका बढ़ गई है।
मानव जीवन की क्षति पर उन्होंने कहा कि यूक्रेन में 10 लाख से अधिक लोग हताहत हुए हैं, लेकिन ईरान युद्ध में अब तक हुई जनहानि इससे कहीं अधिक है, जिसकी कोई कीमत निर्धारित नहीं की जा सकती।
स्टब ने कहा कि आज की दुनिया ‘लेन-देन’ पर आधारित हो गई है, जहां कूटनीति को ‘परस्पर लाभ’ के नजरिए से नहीं देखा जा रहा है। इसी गतिरोध के कारण उन्हें निकट भविष्य में ईरान में युद्धविराम की कोई संभावना दिखाई नहीं देती।
उन्होंने चिंता जताई कि ईरान में ‘अराजकता’ का अर्थ होगा पूरी दुनिया के लिए एक नया और अधिक बड़ा संकट।
‘सत्ता परिवर्तन’ पर उन्होंने कहा कि यह केवल हवाई हमलों से संभव नहीं है। अफगानिस्तान और इराक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इससे केवल हिंसा और आतंकवाद में वृद्धि होती है।
मंत्रियों और व्यापारिक दिग्गजों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आये स्टब ने कहा कि उनके साथ फिनलैंड की लगभग 20 कंपनियां आई हैं। उनका मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिनलैंड विशेष रूप से नेटवर्क प्रणाली, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष, चक्रीय अर्थव्यवस्था और खाद्य उत्पादों जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
इससे पूर्व, मुंबई विश्वविद्यालय में उन्होंने ‘शक्ति के त्रिकोण’ की चर्चा की, जिसमें वैश्विक पश्चिम, पूर्व और दक्षिण शामिल हैं।
राष्ट्रपति स्टब ने दृढ़तापूर्वक कहा, ‘ग्लोबल साउथ ही यह निर्धारित करेगा कि अगली विश्व व्यवस्था कैसी होगी।’
भाषा सुमित माधव
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