समाज और देशों की प्रगति में शिक्षा की अहम भूमिका : आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा

समाज और देशों की प्रगति में शिक्षा की अहम भूमिका : आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा

समाज और देशों की प्रगति में शिक्षा की अहम भूमिका : आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा
Modified Date: August 25, 2026 / 09:58 pm IST
Published Date: August 25, 2026 9:58 pm IST

(फोटो के साथ)

मुंबई, 25 अगस्त (भाषा) ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने मंगलवार को कहा कि समाज और देशों की प्रगति में शिक्षा एक महत्वपूर्ण कारक है और आबादी के एक बड़े हिस्से को शिक्षा व्यवस्था से बाहर रखना उन्हें पिछड़ेपन की ओर धकेलने के समान है।

नेटवर्क ऑफ वुमेन इन मीडिया, इंडिया (एनडब्ल्यूएमआई) की ओर से मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में बोरा ने कहा कि मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, साक्षरता, खुशहाली और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे मानकों पर समाजों और देशों की तुलना करने वाले कई अध्ययनों में शिक्षा को प्रगति को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण साझा कारक पाया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘एक साझा कारक शिक्षा है। अगर आप असमानताओं को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं और समाज के एक बड़े हिस्से को शिक्षा से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं, तो आप यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि आप पीछे ही बने रहें।’’

बोरा ने दावा किया कि वामपंथी दलों को छोड़कर अन्य राजनीतिक दल शिक्षा को प्राथमिकता नहीं देते। बोरा ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जुलाई में दिल्ली में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ 23 दिन की भूख हड़ताल की थी।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पीएचडी कर रहीं बोरा ने कहा कि देश के पिछड़ने पर सवाल उठाने के साथ-साथ समाज के एक बड़े हिस्से को शिक्षा तक पहुंच से वंचित करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया जाना चाहिए।

आइसा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध छात्र संगठन है।

झारखंड में भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भी हिस्सा ले चुकीं बोरा ने कहा कि असमानताओं को कम करने और व्यापक सामाजिक विकास सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा तक समावेशी पहुंच आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा लोगों के कल्याण के लिए है और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

बोरा ने कहा, ‘‘सपना एक ऐसे देश का निर्माण करना था जो समानता पर आधारित हो। लोकतंत्र मूल रूप से समानता के बारे में है। हमें उन पूर्वजों का सम्मान करना चाहिए जिन्होंने इस आदर्श के लिए संघर्ष किया और उनकी दृष्टि को आगे बढ़ाना चाहिए। समानता एक खूबसूरत चीज है और यह न्यायपूर्ण समाज की नींव है।’’

आइसा अध्यक्ष ने कहा कि आज दिखाई देने वाली समस्याएं वर्षों से पैदा हो रही हैं और शिक्षा का स्थान धीरे-धीरे निजीकरण लेता गया है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यावहारिक समाधानों पर आधारित व्यापक बदलाव की जरूरत पर बल दिया।

इस कार्यक्रम में मॉडल रिया अहीर ने भी अपने विचार रखे। रिया पिछले महीने छात्र प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने से रोकने के लिए मुंबई पुलिस की एक वैन के सामने खड़े होने के बाद देशभर में चर्चा में आई थीं।

अहीर ने कहा कि राजनीति हमेशा से उनके जीवन का हिस्सा रही है और वह सामाजिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखती रही हैं।

अहीर ने कहा, ‘‘हमारे माता-पिता हमारी आलोचना इसलिए करते हैं क्योंकि वे चाहते हैं कि हम बेहतर करें। वे हमारी आलोचना इसलिए करते हैं क्योंकि वे हमसे प्यार करते हैं। इसी तरह सरकार पर सवाल उठाने और उसकी आलोचना करने का यह मतलब नहीं है कि हम अपने देश से प्यार नहीं करते। यह हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है और देश के भविष्य को लेकर हमारी चिंता से पैदा होता है।’’

बोरा और अहीर दोनों ने कहा कि उनके परिवारों की सेना से जुड़ी पृष्ठभूमि ने उन्हें सामुदायिक जीवन के महत्व को समझना सिखाया है।

कश्मीर में ‘‘आजादी’’ के नारों के समर्थन से जुड़े सवाल पर बोरा ने कहा, ‘‘मैं कश्मीरियों की आकांक्षाओं का समर्थन करती हूं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कहती है कि उसके शासन में कश्मीरी खुश हैं।’’ आइसा अध्यक्ष ने युवाओं की आकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की सराहना की।

भाषा रवि कांत रवि कांत पवनेश

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