पालघर के आवासीय स्कूल में सात वर्षीय छात्र की बुखार से मौत, 30 अन्य अस्पताल में भर्ती

पालघर के आवासीय स्कूल में सात वर्षीय छात्र की बुखार से मौत, 30 अन्य अस्पताल में भर्ती

पालघर के आवासीय स्कूल में सात वर्षीय छात्र की बुखार से मौत, 30 अन्य अस्पताल में भर्ती
Modified Date: August 25, 2026 / 09:25 pm IST
Published Date: August 25, 2026 9:25 pm IST

पालघर, 25 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र में पालघर जिले के एक आवासीय स्कूल के सात वर्षीय छात्र की तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी के चलते मौत हो गई जबकि सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षणों वाले 30 अन्य छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

छात्र की मौत के बाद स्कूल के अधीक्षक को ड्यूटी में ‘‘गंभीर लापरवाही’’ के आरोप में निलंबित कर दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने स्कूल की रसोई का निरीक्षण किया और सामान के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे।

इससे पहले, इस महीने की शुरुआत में गढ़चिरौली जिले के एक आवासीय स्कूल के छात्रावास में फर्श पर सोई तीन आदिवासी छात्राओं की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई थी।

पालघर के मामले में, आश्रम स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ने वाले छात्र को 22 अगस्त को तेज बुखार हुआ और इलाज के लिए उसे स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ले जाया गया।

सोमवार को जब उसका बुखार फिर से बढ़ा, तो पीएचसी के चिकित्सा अधिकारी ने उसका ऑक्सीजन स्तर गिरता हुआ पाया और उसे एंबुलेंस से मनोर के ग्रामीण अस्पताल ले जाने की सलाह दी।

अधिकारी ने बताया कि बच्चे को अस्पताल ले जाने के बाद चिकित्सा अधिकारियों ने ईसीजी किया और उसे मृत घोषित कर दिया।

उन्होंने कहा कि मौत का सही कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद पता चलेगा।

घटना के बाद स्वास्थ्य और प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया। स्कूल के कुल 449 छात्रों में से 395 वहीं रहकर पढ़ते हैं। चिकित्सकों की एक टीम ने परिसर में सभी छात्रों की स्वास्थ्य जांच की।

अधिकारी ने बताया कि सावधानी के तौर पर सर्दी, खांसी या बुखार के हल्के लक्षण वाले 30 छात्रों को मसवन पीएचसी में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है, जिनकी हालत स्थिर बताई गई है।

एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के अधिकारी विशाल खत्री ने स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया तथा अस्पताल में भर्ती छात्रों और उनके माता-पिता से मुलाकात की।

खत्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘जिला स्वास्थ्य अधिकारी की सलाह के अनुसार, मसवन आश्रम स्कूल में दोबारा स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया गया। स्कूल परिसर की सफाई और पानी को साफ करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरती जाएंगी।’’

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि छात्र की दुखद मौत की विस्तृत जांच करने, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने के सिलसिले में विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया गया है।

पालघर जिला प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।’’

बयान में कहा गया कि आदिवासी विकास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त के दौरे के दौरान ड्यूटी में गंभीर लापरवाही को लेकर स्कूल के अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

इसके अलावा, सहायता प्राप्त स्कूल चलाने वाली संस्था आदिवासी सेवा मंडल, मुंबई के अध्यक्ष और सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

बयान में कहा गया, ‘‘प्रशासन की तत्काल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे जल्द स्वस्थ हों और ऐसी घटना दोबारा न हो। इसी उद्देश्य से पालघर के सभी स्कूलों में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जा रहे हैं और बुखार, सर्दी, खांसी आदि जैसे लक्षण वाले छात्रों को निगरानी में रखा जा रहा है।’’

इसमें कहा गया, ‘‘मसवन पीएचसी में 30 छात्र निगरानी में हैं, जिनमें 14 लड़के और 11 लड़कियां हैं। बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह पर चार लड़कियों और एक लड़के को बेहतर इलाज के लिए पालघर जिले के मनोर में ग्रामीण अस्पताल भेजा गया है। छात्रों की हालत खतरे से बाहर है। उन्हें केवल सावधानी के तौर पर निगरानी में रखा गया है।’’

बयान के अनुसार, एफडीए के अधिकारियों ने स्कूल की रसोई का भी निरीक्षण किया और खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों जैसे मसाले, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और तेल के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए।

अधिकारियों ने मौके पर कीटों से बचाव की व्यवस्था और पानी साफ करने की प्रणालियों की भी जांच की।

अधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में औसतन लगभग हर दिन एक छात्र की मौत हुई है। इस दौरान राज्य सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त आवासीय संस्थानों में कुल 584 छात्रों की मौत हुई।

उन्होंने कहा कि मौत के कारणों में सांप का काटना, सिकल सेल बीमारी, गंभीर बीमारियां, दुर्घटनाएं और आत्महत्या शामिल थी।

गढ़चिरौली में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की हालिया मौत को लेकर भारी आलोचना का सामना करने वाली सरकार ने सुधार के कदम शुरू किए हैं, जिनमें आवासीय स्कूल का लाइसेंस रद्द करना और पूरे राज्य में ऐसी सभी संस्थाओं की व्यापक सुरक्षा जांच करना शामिल है।

भाषा जोहेब नेत्रपाल

नेत्रपाल


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